-सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी की अपील खारिज
-छात्रवृृत्ति के 4 लाख 95 हजार रुपये की रिकवरी के आदेश को भी किया रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय बड़ा झटका देते हुए सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ उसकी अपील अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने छात्र को डिग्री जारी करने का आदेश देते हुए उससे छात्रवृत्ति के 4 लाख 95 हजार की वसूली के आदेश को भी रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीएचडी शोधार्थी जो तबला में अंशकालिक डिप्लोमा कर रहा हो, उसे डाक्टरेट की डिग्री से वंचित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्र को डिग्री दिए जाने से पहले छात्रवृत्ति राशि लौटाने की कोई शर्त उचित नहीं है और यह निर्णय विश्वविद्यालय की मनमानी को दर्शाता है।
प्रदीप कुमार देशवाल ने 2013-14 में कानून विषय में पीएचडी के लिए दाखिला लिया था। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने, शोध कार्य सम्पन्न करने और मौखिक परीक्षा में सम्मिलित होने के बावजूद 2021 में जारी डिग्री सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। विश्वविद्यालय ने नियमों के उल्लंघन और तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाते हुए डिग्री जारी करने से इनकार कर दिया। 4,95,833 रुपये की वसूली भी डाल दी गई। छात्र ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे एकल पीठ ने 11 फरवरी 2025 को स्वीकार कर लिया। विश्वविद्यालय द्वारा इसके विरुद्ध डिवीजन बेंच में अपील की गई जिसे जस्टिस लिसा गिल और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्र ने डिप्लोमा इन तबला कोर्स पार्ट टाइम और शाम की कक्षाओं के माध्यम से किया, जो पीएचडी के अध्ययन में बाधा नहीं था। छात्र के वकील के रूप में नामांकन (2011) के बावजूद उसने 2020 तक अदालत में कोई प्रैक्टिस नहीं की जिसका विश्वविद्यालय द्वारा खंडन नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा छात्रवृत्ति राशि लौटाने की शर्त लगाना मनमाना और अनुचित था।