नीति में कई बदलाव किए
बीते कुछ वर्षों में इस नीति में कई बदलाव किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद यह सवाल अब भी कायम है कि क्या यह नीति अपने मूल उद्देश्य ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में सफल होगी या फिर यह विद्यार्थियों पर अनावश्यक बोझ बनती जा रही है। राज्य सरकार ने इस बॉन्ड पॉलिसी को लागू करते समय एक स्पष्ट तर्क दिया था।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई पर भारी सब्सिडी दी जाती
है, इसलिए यह अपेक्षा की जाती है कि डॉक्टर पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ वर्षों तक राज्य की सेवा करें। विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में डॉक्टरों की कमी को दूर करना इस नीति का मुख्य उद्देश्य रहा है। यह तर्क अपनी जगह पर मजबूत भी दिखाई देता है, क्योंकि हरियाणा ही नहीं, देश के अधिकतर राज्यों में ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। समस्या नीति के उद्देश्य में नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन में है। नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। विद्यार्थियों द्वारा बार-बार यह शिकायत की गई है कि सेवा की शर्तें, नियुक्ति की प्रक्रिया और कार्यस्थल को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं। इससे असमंजस की स्थिति पैदा होती है और विद्यार्थियों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
छात्रों ने मांगे सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश
बॉन्ड नीति के तहत एमबीबीएस करने वाले छात्रों की डिग्री पूरी हो चुकी है। इसमें कई विद्यार्थियों की इंटर्नशिप पूरी होने के कगार पर है। छात्रों को आगे क्या करना है, इस बारे में कोई सरकार की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिल रहे हैं। यह भी नहीं बताया जा रहा है कि सरकार इस बारे में क्या सोच रही है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार सरकार से नीति से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं जैसे कार्यस्थल व कार्य के घंटों की सही जानकारी, पीजी करने के बाद दोबारा ज्वाइनिंग करने की प्रक्रिया आदि पर स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं लेकिन अभी तक उन्हें कोई लिखित जवाब नहीं मिला है।
छात्रों की मांग है कि उन्हें स्पष्ट किया जाए कि उनकी नौकरी का क्या स्वरूप और पदनाम होगा। कितना वेतन दिया जाएगा और ट्रांसफर नीति क्या होगी। यहां तक सरकार की ओर से अभी तक कोई नौकरी प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है। भर्ती या पोस्टिंग के लिए कोई आधिकारिक पोर्टल शुरू नहीं किया गया है जबकि इस बारे में सरकार की ओर से साल 2022 में ही स्पष्ट कर दिया गया था कि जॉब पोर्टल जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
प्रोविजनल डिग्री भी नहीं मिली, सरकारी नौकरी में भी बाधा
छात्रों को कम से कम प्रोविजनल डिग्री दे दी जाएं, जिससे सरकारी संस्थानों में निकलने वाली पदों को ही ज्वाइन किया जा सके। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने 450 मेडिकल आफिसर के पद निकाले थे। इनमें से कई डॉक्टरों का अच्छा पेपर हुआ है, लेकिन जब तक प्रोविजनल डिग्री नहीं मिलती तब तक वे इस नौकरी को ज्वाइन नहीं कर सकेंगे। इस प्रशासनिक देरी का असर न केवल छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। करीब 600 प्रशिक्षित एमबीबीएस डॉक्टर इस समय सरकारी प्रक्रिया में देरी के कारण सेवा देने से वंचित हैं, जिससे आम जनता को भी चिकित्सा सुविधाओं का नुकसान हो रहा है।
सरकार ने देर से दिया ध्यान
हरियाणा सरकार ने साल 2022 में बॉन्ड नीति की संशोधित अधिसूचना जारी की थी। सरकार को पता था कि फरवरी में एमबीबीएस कोर्स पूरा हो जाएगा। ऐसे में इसकी तैयारी से पहले से ही करनी चाहिए थी। 600 डॉक्टर जब एमबीबीएस करके निकलेंगे तो उनके लिए पहले से ही सरकारी संस्थानों में पद सृजित करने चाहिए थे या फिर मेडिकल कॉलेज में समायोजित करने की योजना बनाते। मगर ऐसा नहीं हुआ। सूत्र बताते हैं कि दिसंबर में यह बैठक आयोजित की गई और उसमें सभी बिंदुओं पर चर्चा की गई। हालांकि बैठक में इन डॉक्टरों के पदनाम, सैलरी, मेडिकल कॉलेज में समायोजन जैसे विषय तय कर किए गए। इन डॉक्टरों को 75 हजार प्रति माह सैलरी व हर साल पांच साल वेतन वृद्धि तय किया गया। बैठक में यह जानकारी दी गई कि स्वास्थ्य विभाग ने 3000 अतिरिक्त पद बनाने का प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया है। यह बैठक तो जरूर हुई मगर यह सब मीटिंग आफ मिनट्स थे। अभी तक इसका कोई नोटिफिकेशन नहीं दिया गया है।
क्या कहते हैं डाॅक्टर
हमारी बात बिल्कुल साफ है। हम लोग सेवा के लिए तैयार हैं, मगर सम्मानजनक वेतन और बेहतर कार्य-परिस्थितियों के साथ। -डॉ. विनय चौधरी, एमबीबीएस छात्र
हम सरकार के साथ टकराव नहीं, बल्कि एक संतुलित समाधान चाहते हैं। ऐसा समाधान जिसमें जनसेवा भी मजबूत हो और युवा डॉक्टरों का मनोबल भी बना रहे। - डॉ. सुनील अत्री, एमबीबीएस छात्र
हम चाहते हैं कि यह नीति ऐसी बने जिसमें सरकार और डॉक्टर, दोनों का भरोसा बना रहे। सेवा भी हो, लेकिन ऐसी शर्तों पर हो जो लंबे समय तक टिकाऊ और न्यायसंगत हों। -डॉ. पुष्पेंद्र सोनी, एमबीबीएस छात्र
एमबीबीएस छात्रों के हित के लिए सरकार सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर रही है। छात्रों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। कानूनविद् से भी राय ली जा रही है। जल्द ही कोई समाधान निकलेगा। -आरती राव, स्वास्थ्य मंत्री