हरियाणा की जेलों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के साथ अब जेलों में बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर भी उतना ही जोर दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा व्यवस्था, नई हाई सिक्योरिटी जेलों का निर्माण, ओपन जेलों के जरिए सामान्य जीवन का माहौल, आईटीआई और तकनीकी प्रशिक्षण तथा रिहाई के बाद रोजगार से जोड़ने जैसी पहलों ने जेल प्रशासन को नई दिशा दी है।
प्रदेश में वर्तमान में तीन केंद्रीय जेल, 17 जिला जेल और दो ओपन एयर जेल हैं। इनकी कुल अधिकृत क्षमता 24,280 बंदियों की है, जबकि एक अगस्त 2026 तक 26,860 बंदी जेलों में निरुद्ध थे। क्षमता से अधिक बंदियों की संख्या को देखते हुए सरकार एक ओर नई जेलों के निर्माण पर काम कर रही है तो दूसरी ओर मौजूदा जेलों को आधुनिक सुविधाओं और तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है।
रोहतक में हाई सिक्योरिटी जेल, कई जिलों में नई जेलों की तैयारी
जेल विभाग की बड़ी उपलब्धियों में नई और उच्च सुरक्षा वाली जेलों का निर्माण प्रमुख है। रोहतक में करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से 312 बंदियों की क्षमता वाली हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा फतेहाबाद में 1,200 बंदियों की क्षमता वाली नई जिला जेल का निर्माण किया जा रहा है। चरखी-दादरी में 1,200 और पंचकूला में 954 बंदियों की क्षमता वाली नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में भी कार्रवाई जारी है।
जेलों की सुरक्षा को तकनीक से मजबूत करने के लिए केंद्रीय जेल अंबाला में अत्याधुनिक कॉल ब्लॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई है। केंद्रीय जेल हिसार सहित फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और सिरसा की जेलों में भी आधुनिक निगरानी तकनीक स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए 9.16 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। बंदियों और अपराधियों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए माप संग्रहण इकाइयां भी स्थापित की गई हैं। इनमें उंगलियों के निशान, चेहरे की पहचान, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन जैसी जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। यह व्यवस्था जेल सुरक्षा के साथ अपराध की जांच में भी आधुनिक तकनीक के उपयोग को मजबूती देगी।
जेल की चारदीवारी से बाहर की जिंदगी के लिए तैयारी
हरियाणा जेल प्रशासन की सुधारात्मक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बंदियों को सामान्य जीवन में लौटने के लिए तैयार करना है। फरीदाबाद और करनाल में ओपन एयर जेल स्थापित की गई हैं, जहां बेहतर आचरण वाले बंदियों को परिवार के साथ रहने का अवसर मिल रहा है। दोनों जेलों में वर्तमान में 48 बंदी परिवारों के साथ रह रहे हैं। पलवल को छोड़कर प्रदेश की सभी जेलों में सेमी ओपन एयर जेल की व्यवस्था की गई है। इनकी कुल क्षमता 487 बंदियों की है और 178 बंदियों को इनमें रहने की अनुमति दी गई है। इस पहल का उद्देश्य बंदियों में जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना पैदा करना है।
बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में पांच जेलों में आईटीआई केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां 12 ट्रेडों में औद्योगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 255 बंदी प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत हैं। गुरुग्राम जिला जेल में तकनीकी डिप्लोमा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का काम भी चल रहा है।
प्रशिक्षण के बाद रोजगार की राह आसान बनाने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के साथ समझौता किया गया है। अब तक 117 प्रशिक्षित बंदियों का एचके आरएनएल पोर्टल पर पंजीकरण किया जा चुका है। जेल विभाग की यह पहल बंदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जेल उत्पादों से करोड़ों का कारोबार, पेट्रोल पंपों से नई पहचान
जेल की कार्यशालाओं में तैयार होने वाले उत्पाद अब बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। बंदियों द्वारा तैयार फर्नीचर, हस्तशिल्प, कपड़े, खाद्य सामग्री और सजावटी वस्तुओं को विभिन्न मेलों और आयोजनों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले और गीता जयंती महोत्सव में भी जेल उत्पादों के स्टॉल लगाए गए।पिछले वर्ष जेलों में तैयार उत्पादों की 1.76 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी, जबकि चालू वर्ष में अब तक 1.52 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की जा चुकी है। यह पहल बंदियों को काम के माध्यम से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है।