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Chandigarh-Haryana News: वकील अदालतों के लिए होते हैं विभागों के लिए नहीं

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- जिला अदालतों में अभियोजन संकट पर हाईकोर्ट सख्त
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- सभी विभागों में तैनात सरकारी वकीलों को कोर्ट में तैनात करने का आदेश
- गैर न्यायिक तैनाती पर उठाए हाईकोर्ट ने सवाल, एक सप्ताह में 285 कानून अधिकारियों की वापसी का


चंड़ीगढ़। जिला अदालतों में अभियोजन पक्ष के वकीलों की भारी कमी के बीच सरकारी वकीलों की सरकारी विभागों में गैर न्यायिक कार्याें के लिए प्रतिनियुक्ति के मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वकील अदालतों के लिए होते हैं विभागों के लिए नहीं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए 285 जिला अटाॅर्नी, डिप्टी जिला अटाॅर्नी और सहायक जिला अटाॅर्नी को तत्काल प्रभाव से वापस बुलाकर एक सप्ताह में जिला अदालतों में तैनात किया जाए।


सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जिला अदालतें कानून अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही हैं, जिससे आपराधिक मामलों की सुनवाई और ट्रायल बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे की समीक्षा में पाया कि प्रशिक्षित कानून अधिकारियों की तैनाती बड़ी संख्या अदालतों की बजाय गैर न्यायिक कार्यों में की गई है, जबकि निचली अदालतों में अभियोजन पक्ष की रीढ़ माने जाने वाले अधिकारियों का गंभीर अभाव बना हुआ है।
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खंडपीठ ने कहा कि जब जिला न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों का दबाव लगातार बढ़ रहा हो, तब कानून अधिकारियों को विभागीय कार्यों में लगाना न्यायिक व्यवस्था के हितों के विपरीत है। अदालत ने साफ किया कि सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया जारी होने या नए विज्ञापन जारी करने जैसे तर्क तत्काल राहत का विकल्प नहीं हो सकते। मौजूदा संकट को देखते हुए उपलब्ध मानव संसाधन को पहले न्यायालयों में लगाया जाना आवश्यक है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार स्वीकृत 644 पदों वाले अभियोजन ढांचे में बड़ी संख्या या तो रिक्त है अथवा अधिकारी प्रतिनियुक्ति के कारण न्यायिक कार्य से बाहर हैं। हाईकोर्ट ने अब सरकार से सभी संवर्गों की कुल स्वीकृत संख्या, वर्तमान कार्यरत संख्या, जिला-वार रिक्तियां तथा रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा मांगा है।
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