नशे के खिलाफ एक प्रतीकात्मक कदम
इस अभियान की अहमियत को समझाते हुए डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि जिस तरह चीनी इंजन को जाम कर बेकार बना देती है, उसी तरह नशा दिमाग को बर्बाद कर देता है। इससे दूर रहें और दूसरों को भी बचाएं।
बकेट चैलेंज कैसे लें?
- इस चैलेंज को लेना बेहद आसान है और इसकी भागीदारी आधारित प्रकृति ही इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है।
- एक बाल्टी में कीचड़ भरा पानी भरें, जो नशे के दुष्प्रभावों का प्रतीक है।
- इस गंदे पानी को फेंकने का वीडियो बनाएं, जो नशे को छोड़ने और स्वच्छ जीवन अपनाने के संकल्प को दर्शाता है।
- नशा मुक्ति की शपथ लें- मैं नशा मुक्त जीवन जीने की शपथ लेता/लेती हूं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करूंगा/करूंगी।”
- कम से कम तीन अन्य लोगों को नामांकित करें – दोस्त, परिवार के सदस्य या सहकर्मी।
- वीडियो को सोशल मीडिया पर #BucketChallenge और #NashaMuktJeevan के साथ पोस्ट करें।
- दूसरों को भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें, जिससे यह अभियान और आगे बढ़े।
इस अनोखे प्रारूप ने व्यक्तिगत संकल्प को एक सामाजिक आंदोलन में बदल दिया है, जहां हजारों लोग इसे अपना रहे हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सेलिब्रिटी भी आएंगे आगे?
इस अभियान को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए DGP ओपी सिंह ने तीन प्रमुख भारतीय हस्तियों को बकेट चैलेंज स्वीकार करने के लिए आमंत्रित किया है
राजकुमार राव – गुरुग्राम से आए प्रतिभाशाली बॉलीवुड अभिनेता, जिन्होंने अपनी मेहनत से फिल्म इंडस्ट्री में खास जगह बनाई।
नीरज चोपड़ा – भारत के पहले ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी, जिन्होंने पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया।
विजेंदर सिंह – भारत के प्रसिद्ध मुक्केबाज और अनुशासन तथा दृढ़ता के प्रतीक।
इन प्रसिद्ध हस्तियों की भागीदारी से यह अभियान कई गुना तेजी से फैलेगा, क्योंकि इनके लाखों प्रशंसक इस चैलेंज को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
रिकॉर्ड तोड़ रहा है बकेट चैलेंज
महज 10 दिनों में 2.7 मिलियन व्यूज पार कर चुका बकेट चैलेंज अब तक के सबसे तेजी से बढ़ने वाले नशा विरोधी अभियानों में से एक बन गया है। अगला लक्ष्य 10 मिलियन व्यूज का है, जिसे अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस से पहले पूरा करने की योजना बनाई गई है।
अब यह अभियान हरियाणा से निकलकर पूरे देश में फैल रहा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, छात्र, प्रोफेशनल्स और पुलिस अधिकारी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे यह एक राष्ट्रीय आंदोलन बनता जा रहा है।
हरियाणा पुलिस पहले भी कड़े कानूनों, जागरूकता अभियानों और पुनर्वास कार्यक्रमों के माध्यम से नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रही थी। लेकिन बकेट चैलेंज ने इस लड़ाई में एक डिजिटल और सामाजिक आयाम जोड़ दिया है, जिससे यह संदेश युवा पीढ़ी तक भी आसानी से पहुंच रहा है।