अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल पद पर चयनित उम्मीदवार की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब किसी उम्मीदवार पर ऐसे अपराध में चार्ज फ्रेम हो चुके हों जिसकी सजा तीन साल या उससे अधिक हो, तो उसे नियुक्ति नहीं दी जा सकती। हिसार निवासी याचिकाकर्ता विनोद कुमार एससी श्रेणी में कांस्टेबल पद के लिए चयनित हुआ था। एसपी कैथल ने उसे 19 अक्टूबर 2024 को औपचारिक प्रक्रिया के लिए बुलाया था लेकिन दो एफआईआर दर्ज होने के कारण उनकी नियुक्ति रोक दी गई।
पहली एफआईआर में ट्रायल कोर्ट ने विनोद को 15 नवंबर 2022 को बरी कर दिया था और अपील भी बाद में वापस ले ली गई। दूसरी एफआईआर में उसके खिलाफ 3 मई 2017 को चार्ज फ्रेम हुए थे और वेरिफिकेशन के समय ट्रायल लंबित था। विनोद ने पहले याचिका दायर की थी जिसमें कोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को राज्य को दो महीने में निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसी के पालन में विभाग ने 10 फरवरी 2025 को उनका दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नियमों के कारण नियुक्ति संभव नहीं।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि वेरीफिकेशन के समय तक विनोद दोनों मामलों में बरी हो चुका था। इसलिए बरी उम्मीदवार को नियुक्ति मिल सकती है। वकील ने हाई कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया। राज्य ने प्रतिवाद में कहा कि वेरिफिकेशन के दिन मुकदमा लंबित था, इसलिए मामला सीधे-सीधे क्लाज (बी) में आता है, जो नियुक्ति पर स्पष्ट रोक लगाता है। कोर्ट ने गहन विश्लेषण के बाद पाया कि जिस समय एसपी कैथल ने वेरीफिकेशन किया तब एक एफआईआर का ट्रायल चल रहा था। चार्ज 2017 में फ्रेम हो चुके थे। इसलिए नियुक्ति पर रोक लगाना कानूनन उचित था। हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।