-पोर्टल को पंजीकरण के लिए खोलने की याचिकाओं में की गई है मांग
-हाईकोर्ट इन याचिकाओं पर ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद करेगा सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में ग्रुप-सी पदों के लिए प्रस्तावित कामन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तकनीकी समस्याओं व परीक्षा के लिए आवेदन से वंचित रह गए सैकड़ों उम्मीदवार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई है कि आवेदन पोर्टल को दोबारा खोला जाए और जिनका रजिस्ट्रेशन हो चुका है, उन्हें उसमें सुधार करने का अवसर भी मिले। कुछ याचिकाओं में आधार कार्ड के अनिवार्य करने व कुछ अन्य शर्तों को भी चुनौती दी गई है
याचिका में तर्क दिया है कि रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित समय सीमित था और इस दौरान अनेक तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि उन्होंने आरक्षण श्रेणी में पंजीकरण करने की कोशिश की लेकिन सरल पोर्टल पर जाति प्रमाण पत्र समय पर नहीं बन पाने के कारण उन्हें मजबूरी में सामान्य श्रेणी में आवेदन करना पड़ा। अगर पोर्टल फिर से खोला जाए तो वे संशोधन कर वास्तविक श्रेणी का लाभ ले सकते हैं। एक अन्य याचिका में बताया गया कि जब उसने पोर्टल पर आवेदन करना चाहा, तो हर बार ओटीपी देर से आने के कारण वह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों को तकनीकी बाधाओं के कारण आवेदन का मौका नहीं मिल सका, उनके लिए पोर्टल दोबारा खोला जाए ताकि वे परीक्षा में भाग लेने से वंचित न रह जाएं। इसी तरह, एक अन्य याचिकाकर्ता ने परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को चुनौती दी है। उनका कहना है कि जब परीक्षा एक से अधिक शिफ्टों में कराई जाती है, तो सभी परीक्षार्थियों को एक जैसी कठिनाई नहीं मिलती। इसलिए, यह सुनिश्चित किया जाए कि सीईटी परीक्षा केवल एक ही शिफ्ट में कराई जाए। कोर्ट इस मामले की सुनवाई ग्रीष्म कालीन अवकाश के बाद 1 जुलाई को करेगा।