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विधानसभा सत्र में हुड्डा-विज आमने-सामने: एक-दूसरे पर जमकर कटाक्ष, पूर्व CM बोले- झूठा साबित हुआ भाजपा का वादा

Sat, 26 Oct 2024 10:19 AM IST
नवीन दलाल अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

डाॅ. रघुबीर कादियान और मंत्री महिपाल ढांडा रिश्ते में मामा-भांजा हैं। सत्र के दौरान दोनों के बीच बहस हो गई। ढांडा ने कादियान को अपना मामा कहते हुए उनके साथ एक और शब्द जोड़ दिया था, जिस पर कांग्रेसियों ने विरोध किया।
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सीएम व पूर्व सीएम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा की पंद्रहवीं विधानसभा के पहले ही सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव दिखा। नेता एक-दूसरे पर कटाक्ष करते दिखे तो सदन में जमकर ठहाके भी लगे। स्पीकर को पदभार ग्रहण कराने के लिए विपक्ष को नहीं बुलाने पर नाराज हुए पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और कैबिनेट मंत्री अनिल विज आमने सामने हो गए। मामला नहीं थमा विज के हमलों को देखते हुए हुड्डा ने वाॅकआउट तक की चेतावनी दे डाली। वहीं, पूर्व स्पीकर डॉ. रघुबीर सिंह कादियान और कैबिनेट मंत्री महिपाल सिंह ढांडा के बीच नोक-झोंक हुई। पहले दिन किसी भी नेता में तीखी बहस तो नहीं हुई, लेकिन एक-दूसरे पर कटाक्ष करने का मौका किसी ने नहीं छोड़ा।

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स्पीकर के चयन के बाद पदभार ग्रहण कराने के समय विपक्ष को नहीं बुलाने पर पूर्व सीएम हुड्डा ने आपत्ति जताई। हुड्डा ने कहा कि हमें क्यों नहीं बुलाया गया। इसी बात को लेकर विज और हुड्डा के बीच बहस शुरू हो गई। बाद में सीएम सैनी खुद हुड्डा और विपक्ष के साथियों को लेकर स्पीकर के पास पहुंचे। बाद में बिजली व परिवहन मंत्री अनिल विज बधाई देने के लिए खड़े हुए। विज ने कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि 2009 से 2014 तक का रिकॉर्ड अगर स्पीकर न देखें तो सही है। चूंकि यह ऐसी विधानसभा थी, जिसमें मुझे (विज) सबसे अधिक बार सदन से बाहर निकाला गया। उन्होंने स्पीकर हरविंद्र कल्याण से आग्रह किया कि वे इस अवधि के रिकाॅर्ड को ब्लैक आउट कर दें। पलटवार में पूर्व सीएम हुड्डा ने कहा कि आपका व्यवहार ही ऐसा रहा होगा कि उस समय के स्पीकर को आपको बाहर निकालना पड़ा।

हुड्डा साहब, आपके पास जो था, उस पर जनता ने कांटा लगा दिया: विज
हुड्डा ने स्पीकर चयन के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से सरकार के विकास कार्यों का जिक्र करने पर आपत्ति जताई। पूर्व सीएम ने कहा सरकार के विकास की बात अगले सत्र में करनी चाहिए। इस पर पलटवार करते हुए विज बोेले, हुड्डा साहब आपके पास जो कुछ था, हरियाणा की जनता ने उस पर कांटा लगा दिया है। विज द्वारा बार-बार कांग्रेस समय के स्पीकर पर हमला बोला गया तो हुड्डा ने यहां तक कह दिया कि अगर आपने ऐसा ही करना है तो हम वाॅकआउट कर जाते हैं। हुड्डा ने स्पीकर को कामयाबी का मूल मंत्र देते हुए कहा, दो आदमियों को कंट्रोल कर लो, पूरा सदन सही से चलेगा। एक महिपाल सिंह ढांडा और दूसरा अनिल विज।
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सदन में भिड़े मामा-भांजा
डाॅ. रघुबीर कादियान और मंत्री महिपाल ढांडा रिश्ते में मामा-भांजा हैं। सत्र के दौरान दोनों के बीच बहस हो गई। ढांडा ने कादियान को अपना मामा कहते हुए उनके साथ एक और शब्द जोड़ दिया था, जिस पर कांग्रेसियों ने विरोध किया। बाद में सफीदों से भाजपा विधायक रामकुमार गौतम ने फिर से भांजे को लेकर हरियाणवी कहावत कहकर मामले को छेड़ दिया। इस पर डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने कहा, ढांडा जब छोटा था तो बड़ा उछलता था। मुर्गियों की तरह उछलता है। स्पीकर से आग्रह करते हुए डॉ. कादियान ने कहा, इसके लिए कोई दवा का प्रबंध किया जाए।

सीएम सैनी ने दिखाई दरियादिली
स्पीकर के पदभार ग्रहण के समय विपक्ष को नहीं बुलाने पर सीएम सैनी खुद हुड्डा के पास पहुंचे और उनका हाथ पकड़कर स्पीकर तक लाए। इसके बाद डिप्टी स्पीकर का चुनाव हुआ तो सीएम सैनी डिप्टी स्पीकर के पदभार ग्रहण करने से पहले ही खड़े हो गए और पूर्व सीएम हुड्डा के पास पहुंच गए। इस पर सदन ने तालियां बजाकर स्वागत किया।

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चुनावी वादे के मुताबिक धान का 3100 रुपये का रेट दे भाजपा सरकार- हुड्डा

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि भाजपा सरकार जानबूझकर धान की खरीद, उठान और भुगतान में देरी कर रही है, क्योंकि सरकार का मकसद कृषि और किसान को घाटे में धकेलना है। हुड्डा विधानसभा सत्र की कार्यवाही के बाद प्रेसवार्ता में सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, अपने वादे को तोड़ना भाजपा की पुरानी आदत है। एकबार फिर भाजपा सरकार किसानों को पूरे एमएसपी और समय पर खाद देने में नाकाम साबित हुई है।

प्रदेश की मंडियों में धान की सुचारू खरीद नहीं होने से किसान एमएसपी से 200-300 रुपये कम रेट में फसल बेचने को मजबूर हैं। वहीं, भाजपा ने चुनाव में किसानों को धान की खरीद 3100 रुपये के रेट पर देने का वादा किया था। लेकिन हमेशा की तरह भाजपा का यह वादा भी झूठा साबित हुआ।

हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय किसानों को कभी भी अपनी फसल बेचने में कोई दिक्कत पेश नहीं आती थी। जे फॉर्म काटने के बाद तीन दिन में उनका पूरा भुगतान हो जाता था। लेकिन अब किसानों को फसल का भुगतान मिलने में कई-कई दिन और कई-कई महीने तक लग जाते हैं।
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