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Chandigarh-Haryana News: रामपाल की उम्रकैद पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

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-10 साल से जेल में बंद है रामपाल, बीते सप्ताह एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने लगाई थी सजा पर रोक
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- फिलहाल जेल से बाहर नहीं आएगा रामपाल, देश द्रोह के मामले में भी ट्रायल जारी

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। बरवाला के सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2014 में आश्रम में हुई पांच लोगों की मौत के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। पिछले सप्ताह भी हाईकोर्ट ने आश्रम में एक महिला की मिली लाश के मामले में उम्र कैद की सजा पर रोक लगा दी थी। रामपाल पिछले 10 साल से जेल में बंद है और इन दोनों मामलों में सजा पर रोक के बावजूद वह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएगा क्योंकि उसके खिलाफ देशद्रोह के मामले में ट्रायल लंबित है।
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2014 सतलोक आश्रम में दिल्ली की सरिता, संगरूर की मलकीत कौर, राजबाला, संतोष और डेढ़ साल के आदर्श की मौत हो गई थी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। रामपाल की तरफ से उसके वकील अर्जुन श्योराण ने दलील दी कि रामपाल को फंसाया गया है। याची पक्ष ने कहा कि अन्य सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं इसलिए रामपाल को भी समान आधार पर राहत मिलनी चाहिए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता/अपीलकर्ता के खिलाफ यह आरोप जरूर है कि उसने महिलाओं को आश्रम में बंद रखा था लेकिन मेडिकल साक्ष्यों को लेकर गंभीर बहस योग्य मुद्दे मौजूद हैं। अदालत ने यह भी माना कि रामपाल की उम्र 74 वर्ष है और वह पहले ही 10 साल 27 दिन की वास्तविक सजा काट चुका है। फिलहाल, हाईकोर्ट ने रामपाल की शेष सजा पर रोक लगा दी है और यह आदेश मुख्य अपील के निपटारे तक लागू रहेगा। कोर्ट ने सिक्योरिटी बॉन्ड भरने व मजिस्ट्रेट की संतुष्टि पर रामपाल को रिहा करने का भी आदेश दिया अगर वह किसी अन्य मामले वांछित नहीं है तो। पिछले सप्ताह भी वर्ष 2014 में आश्रम के भीतर महिला की मौत के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल की सजा पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। मृतका के पति और सास ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं दिया था। इसे सजा पर रोक का आधार बनाया गया था।
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