-हरियाणा सरकार ने दिव्यांग कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण को किया सीमित
-2 और 23 मई के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की गई है याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में दिव्यांग कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण सीमित करने और इसे ग्रुप-ए की पदोन्नति पर लागू न करने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इस आदेश पर रोक लगा दी जाए। जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने लाडवा निवासी सुमित कुमार व अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ये आदेश न केवल दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में पारित कई निर्णयों के भी विपरीत हैं। सरकार ने 2 मई 2025 और 23 मई 2025 को जारी ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण केवल निम्न स्तरों पर ही दिया जाएगा और ग्रुप-ए के भीतर उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए दिव्यांगजनों को कोई आरक्षण नहीं मिलेगा।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नीति पूरी तरह से असंवैधानिक है और यह संविधान में प्रदत्त समानता, गरिमा तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन करती है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें पूर्ण नागरिक के रूप में समान अवसर दिए जाने चाहिए। याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट से प्रार्थना की गई है कि उक्त दोनों आदेशों को रद्द करें। सरकार को यह निर्देश भी देने की मांग की गई है कि इन आदेशों को जारी करने से संबंधित सभी अभिलेखों (फाइल नोटिंग) को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।
इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने यह भी निवेदन किया है कि जब तक इस याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक इन दोनों विवादित आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए, ताकि दिव्यांग कर्मचारियों के अधिकारों का हनन न हो। याचिका में मुख्य सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड के अध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष को प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट ने इन सभी को 17 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब दायर करने का आदेश दिया है।