-सोनीपत आईटीआई में आउटसोर्सिंग प्रक्रिया के दौरान करोड़ों के गबन का आरोप
-जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जब काम मौजूद है और कर्मियों की जरूरत है तो सरकार नियमित भर्ती क्यों नहीं करती है। इस पॉलिसी के कारण ही भाई-भतीजावाद और घोटाले होते हैं। कोर्ट ने अब याचिका पर हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए सोनीपत निवासी राम निवास ने हाईकोर्ट को बताया कि आईटीआई सोनीपत में कर्मियोंं की आउटसोर्सिंग के नाम पर बड़े स्तर पर गबन हुआ। इस बारे में याची ने 2012 में हाईकोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने तब सरकार को कार्रवाई का आदेश दिया था। सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कोर्ट को बताया गया कि तय वेतन 13 हजार रुपये प्रतिमाह से अधिक था लेकिन कर्मियों को केवल 6 से 7 हजार रुपये भुगतान किया जाता था। कर्मियों का पीएफ और ईएसआई को पैसा जमा करवाने की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया और हर साल सरकार को करीब 72 लाख रुपये का चूना लगाया गया।
कोर्ट ने इस पर सरकार से कहा कि आखिर क्यों नियमित भर्ती नहीं की जा रही है। इस आउटसोर्स व्यवस्था से पारदर्शिता में कमी आती है और अव्यवस्था फैलती है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को चाहिए कि जितने स्टाफ की आवश्यकता है उन्हें नियमित भर्ती किया जाए। हरियाणा सरकार ने फंड की कमी और अन्य दलीलें दीं, जिसे मौखिक तौर पर स्वीकार करने से हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करते हुए सरकार स्थिति को स्पष्ट करे।