-साइबर अपराधों का प्रसार बड़ा खतरा, डिजिटल पेमेंट में जनता के विश्वास को खत्म कर देगा
-साइबर ठगी के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने किया सिरे से खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साइबर ठगी के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह अपराध संगठित साइबर ठगी की श्रेणी में आता है। इससे समाज के कई लोग एक साथ प्रभावित हो सकते हैं और उनका डिजिटल पेमेंट से विश्वास खत्म हो सकता है। यह देश की डिजिटल भारत की आकांक्षाओं के विपरीत है।
जस्टिस सुमित गोयल की एकल पीठ ने कहा कि आरोपी सुहैल से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है ताकि पूरे फर्जीवाड़े की परतें खोली जा सकें और ठगी की गई राशि की रिकवरी की जा सके। मामला नारनौल निवासी उदय सिंह द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर आधारित है, जिसमें उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से अपने संयुक्त खाते से 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी से निकासी का आरोप लगाया था। यह निकासी 9 और 10 अगस्त 2024 को की गई थी।
शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्होंने इंटरनेट बैंकिंग का प्रयोग कभी नहीं किया और उन्हें इन लेनदेन की जानकारी नहीं थी। जांच में सामने आया कि 10 लाख रुपये यूनियन बैंक के एक खाते में स्थानांतरित हुए, जो कि याची के नाम पर है। इससे यह संदेह और गहराया कि आरोपी ने अपने खाते को जानबूझकर साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल करने दिया। याची ने कहा कि वह 22 वर्षीय युवक है और 2017 से मानसिक व तंत्रिका संबंधी रोगों से पीड़ित है। याचिकाकर्ता बैंक खाता स्वयं संचालित करने में अक्षम है। उनके करीबी रिश्तेदार ने उसका खाता खोलकर अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर किया और उसी ने संपूर्ण बैंकिंग ऑपरेशन किया। यह भी तर्क दिया गया कि आरोपी के पास चेकबुक, पासबुक या एटीएम नहीं था और उससे कोई रिकवरी भी अपेक्षित नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस स्तर पर अग्रिम जमानत दी गई, तो जांच बाधित हो सकती है और साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की संभावना भी बनी रहेगी है।