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Chandigarh-Haryana News: शातिर अपराधी को पत्नी की मृत्यु पर आपातकालीन पैरोल से हाईकोर्ट का इन्कार

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पुलिस हिरासत में अंतिम संस्कार में शामिल होने की हाईकोर्ट ने दी अनुमति
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चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने शातिर अपराधी की पत्नी की मृत्यु के आधार पर मांगी गई आपातकालीन पैरोल को अस्वीकार कर दिया है। याची आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और कोर्ट ने माना कि वह हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता, क्योंकि उसने अपने नवीनतम अपराध के बाद पांच वर्ष की सजा पूरी नहीं की है। हालांकि, मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कोर्ट ने कैदी को सीमित समय के लिए पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी पैरोल) में पत्नी के अंतिम संस्कार और संबंधित रस्मों में शामिल होने की अनुमति दी है।


जस्टिस यशवीर सिंह राठौर ने कहा कि कोई भी ‘हार्डकोर’ कैदी अपने नवीनतम अपराध के बाद पांच वर्ष की सजा पूरी किए बिना आपातकालीन पैरोल का हकदार नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ चार जून 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत नया मामला दर्ज हुआ था इसलिए वह पांच वर्ष की अनिवार्य अवधि पूरी नहीं करता है। याचिका संविधान के अनुच्छेद 226 और हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 की धारा 3 के तहत दायर की गई थी। इसमें केंद्रीय जेल हिसार के अधीक्षक की ओर से 23 दिसंबर 2025 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत आपातकालीन पैरोल का अनुरोध खारिज कर दिया था।
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याचिकाकर्ता वर्ष 2006 में थाना अग्रोहा में दर्ज एफआईआर में धारा 302 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जेल प्रशासन के अनुसार, वह एक हार्डकोर कैदी है। इसके अलावा 10 सप्ताह की पैरोल से लौटने के बाद 04 जून 2025 को उसके पास से कथित तौर पर 620 प्रतिबंधित गोलियां बरामद की गई थीं। ऐसे में एनडीपीएस एक्ट की धारा 22(बी) और प्रिज़न्स एक्ट की धारा 42 के तहत नया मामला दर्ज किया गया। कोर्ट ने एक्ट की धारा 6(2) का हवाला देते हुए कहा कि हार्डकोर कैदी को आपातकालीन पैरोल तभी मिल सकती है जब वह अपने नवीनतम अपराध के बाद लगातार पांच वर्ष की सजा पूरी कर चुका हो और इस दौरान कोई गंभीर जेल या संज्ञेय अपराध न किया गया हो। इन तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने आपातकालीन पैरोल से इनकार को सही ठहराया।
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