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जिम्मेदारियों के बोझ तले दब रहा मन: मन उदास, रिश्ते तनाव में; टेली मानस पर सबसे ज्यादा इसी परेशानी की कॉल

Sat, 10 Oct 2026 12:55 PM IST
Nivedita आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सुबह से शाम तक काम की भागदौड़, ट्रैफिक में बीतते घंटे, नौकरी में आगे निकलने की होड़ और परिवार को समय देने की चिंता। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में जिंदगी की रफ्तार के साथ मानसिक दबाव की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिंदगी में जिम्मेदारियां जितनी बढ़ती हैं, मन की उलझनें भी उतनी ही बढ़ती हैं। परिवार की जरूरतें, करियर की चिंता, आर्थिक दबाव और रिश्तों को निभाने की कोशिश के बीच इंसान अपनी परेशानियां अक्सर मन में ही दबाए रखता है। 

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बाहर से सामान्य दिखने वाला व्यक्ति भीतर ही भीतर ही भीतर तनाव से जूझता रहता है। हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली मानस के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं। हेल्पलाइन पर मदद मांगने वालों में 18 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 82.9 फीसदी है। यह बताता है कि युवावस्था से लेकर मध्य आयु तक का दौर, जिसे जीवन का सबसे मजबूत आधार माना जाता है, वह मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतियों से भरा हो सकता है।

पुरुष मदद मांगने में आगे
आंकड़े यह भी बताते हैं कि मदद मांगने वालों में पुरुषों और महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी है। हेल्पलाइन पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद लेने वालों में 64.4 फीसदी पुरुष और 32.5 फीसदी महिलाएं हैं। करीब 3.08 फीसदी लोगों ने अपनी लैंगिक पहचान नहीं बताई। पुरुषों की अधिक हिस्सेदारी के पीछे क्या कारण हैं, यह आंकड़ा अपने आप में स्पष्ट नहीं करता। हालांकि, यह सवाल जरूर उठता है कि क्या पुरुषों पर परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियों का दबाव अधिक है या वे मानसिक परेशानी से जूझने के बाद अब मदद लेने के लिए आगे आ रहे हैं।
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34.47% लोग उदासी से परेशान, 24% को काम-पढ़ाई और रिश्तों का तनाव
मानसिक परेशानियां कई रूपों में सामने आ रही हैं। कोई लगातार उदासी से जूझ रहा है, तो कोई काम, पढ़ाई और रिश्तों के दबाव में उलझा है। कई लोग अपनी परेशानी किसी से कह नहीं पाते और भीतर ही भीतर टूटते रहते हैं। सबसे बड़ा हिस्सा मन उदास रहने और उससे जुड़े लक्षणों का है। ऐसी शिकायतें 34.47 फीसदी हैं। इसके बाद परीक्षा, कामकाज और रिश्तों से जुड़े तनाव की हिस्सेदारी 24.05 फीसदी है। पढ़ाई में अच्छे अंक लाने का दबाव, नौकरी में प्रदर्शन की चिंता, आर्थिक परेशानियां और रिश्तों में खटास इंसान को मानसिक रूप से थका सकती हैं। नशे और व्यवहार संबंधी लत से जुड़ी शिकायतें 8.07 फीसदी हैं। घबराहट, बेचैनी और डर से जुड़ी शिकायतें 7.54 फीसदी हैं। नींद की परेशानी से जुड़ी शिकायतें 6.61 फीसदी हैं।

चमकते शहरों की अनकही परेशानी, मानसिक मदद के लिए गुरुग्राम सबसे आगे
सुबह से शाम तक काम की भागदौड़, ट्रैफिक में बीतते घंटे, नौकरी में आगे निकलने की होड़ और परिवार को समय देने की चिंता। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में जिंदगी की रफ्तार के साथ मानसिक दबाव की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। हरियाणा की टेली मानस हेल्पलाइन के जिला-वार आंकड़ों में गुरुग्राम से सबसे ज्यादा 878 कॉल दर्ज की गई हैं, जबकि फरीदाबाद करीब 760 कॉल के साथ दूसरे स्थान पर है। भिवानी में करीब 490 और हिसार में 431 कॉल आई हैं।

वहीं, चरखी दादरी से सबसे कम 86 कॉल दर्ज की गईं। महेंद्रगढ़ से करीब 100, सिरसा से करीब 120 और फतेहाबाद से 128 कॉल आई हैं। हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बड़े शहरों में लोग ज्यादा तनाव में हैं या छोटे जिलों में ज्यादा खुश हैं। ज्यादा कॉल का संबंध जागरूकता, हेल्पलाइन तक पहुंच और मदद मांगने की इच्छा से भी हो सकता है।

मानसिक परेशानी छिपाने की झिझक टूटी : विशेषज्ञ
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एमपी शर्मा के अनुसार, हरियाणा मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। पहले उदासी, तनाव या मन की परेशानी को कमजोरी समझकर छिपाया जाता था, लेकिन अब लोग इन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या मानकर मदद लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी ओपीडी में रोजाना 150 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। रिसर्च बताती हैं कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की सोच, भावनाओं, रिश्तों और रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करता है। इसलिए मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को कमजोर समझने या उसकी बात को हल्के में लेने के बजाय उसे सुनना और सहयोग देना जरूरी है। टेली मानस हेल्पलाइन 14416 या 1-800-891-4416 24 घंटे उपलब्ध है। इससे कोई भी मदद ली जा सकती है।

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