निचली अदालत से दो चार्टर्ड अकाउंटेंट को पहले ही मिल चुकी है अग्रिम जमानत
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने 1,596.94 करोड़ के चर्चित एसआरएस ग्रुप घोटाले में आरोपी आठ चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत दे दी है। ये सभी आरोपी सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) गुरुग्राम की ओर से दायर मामले में नामजद थे। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी को चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर आरोप मढ़ने की कोशिश करने की बजाय सभी आरोपियों से पूछताछ और वसूली की कार्रवाई करनी चाहिए थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने जानबूझकर कोई चूक की थी तो शिकायत दायर होने से पहले उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ क्यों नहीं की गई? यह मामला केवल ऑडिटरों की गलती का नहीं बल्कि रेगुलेटरी और टैक्स प्राधिकरणों की नाकामी का भी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का बैंकों से लोन दिलाने में कोई प्रत्यक्ष रोल नहीं था। उनका काम केवल वित्तीय रिपोर्टों का ऑडिट करना था। अदालत ने माना कि उनके खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्हें कंपनी से कोई अनुचित लाभ या रिश्वत मिली।
यह मामला एसएफआईओ की ओर से दायर उस शिकायत से जुड़ा है जिसमें एसआरएस लिमिटेड और उसकी 88 सहयोगी कंपनियों के खिलाफ 1,596 करोड़ के बैंक ऋण के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि एसआरएस ग्रुप के प्रमोटर्स अनिल जिंदल, जितेंद्र कुमार गर्ग, प्रवीण कुमार कपूर, बिशन बंसल, नानक चंद तायल, राजेश सिंगला और सुशील सिंगला ने बैंकों से लिए गए कर्ज का घपला किया। कोर्ट ने कहा कि दो अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट रूचि जैन और पंकज मित्तल को पहले ही ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है इसलिए शेष याचिकाकर्ताओं को भी समान राहत दी जानी चाहिए।