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Chandigarh-Haryana News: नशा मुक्ति के लिए काउंसलिंग व रिहैबिलिटेशन में हरियाणा तीसरे स्थान पर

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युद्ध नशे के विरुद्ध
मानस-2025 रिपोर्ट : हरियाणा से नशा तस्करी से जुड़ी 468 शिकायतें और सूचनाएं दर्ज, 715 लोगों को काउंसलिंग एवं पुनर्वास सहायता मिली



- नशा तस्करी की शिकायतें व सूचनाएं साझा करने में हरियाणा छठे स्थान पर


अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्र सरकार के मानस-2025 पोर्टल की रिपोर्ट में नशे के खिलाफ मुहिम रंग लाती दिख रही है। रिपोर्ट के अनुसार नशा तस्करी से जुड़ी शिकायतें और गोपनीय सूचनाएं साझा करने के मामले में हरियाणा देश में छठे स्थान पर है। राज्य से 468 शिकायतें और सूचनाएं दर्ज की गई हैं जो दर्शाती हैं कि नशा तस्करी के खिलाफ लोगों की भागीदारी और सरकारी एजेंसियों की सक्रियता बढ़ी है। एनसीबी रिपोर्ट-2025 में यह तथ्य उजागर हुए हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक इस श्रेणी में बिहार (1376 शिकायतें ) पहले, उत्तर प्रदेश (1094) दूसरे, राजस्थान (621) तीसरे, दिल्ली (590) चौथे और महाराष्ट्र 517 शिकायतों के साथ पांचवें स्थान पर है। हरियाणा ने पंजाब, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और झारखंड को पीछे छोड़ दिया है। पड़ोसी राज्यों की तुलना करें तो राजस्थान के बाद हरियाणा दूसरे स्थान पर रहा, जबकि पंजाब उससे पीछे रहा है।
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वहीं काउंसलिंग एवं रिहैबिलिटेशन के मामले में हरियाणा का प्रदर्शन और बेहतर रहा। 715 मामलों के साथ राज्य देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया। इस सूची में उत्तर प्रदेश (1115 मामलों के साथ पहले व दिल्ली (823) दूसरे स्थान पर हैं। हरियाणा ने बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, झारखंड, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक को पीछे छोड़ दिया है। इससे स्पष्ट है कि राज्य नशे के शिकार लोगों को इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने में भी बेहतर काम कर रहा है।

पिछले दो वर्षों में हरियाणा सरकार और पुलिस ने नशा मुक्त हरियाणा अभियान को तेज किया है। हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनसीबी) ने विशेष अभियान चलाकर नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ाई। नशा तस्करों की अवैध संपत्तियां जब्त की गईं। सीमावर्ती जिलों में विशेष नाकाबंदी की गई, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाए गए तथा मानस हेल्पलाइन के माध्यम से लोगों को गोपनीय तरीके से शिकायत और सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके साथ ही डी-एडिक्शन सेंटरों और पुनर्वास सेवाओं का भी विस्तार किया गया।
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चुनौतियां बरकरार
चुनौती अभी भी बनी हुई है। पंजाब और राजस्थान से लगती सीमाओं के जरिए तस्करी की कोशिशें, युवाओं में सिंथेटिक नशे का बढ़ता खतरा और नशा छोड़ चुके लोगों के दीर्घकालिक पुनर्वास की जरूरत सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनभागीदारी, सख्त कार्रवाई और प्रभावी पुनर्वास व्यवस्था से ही नशे के खिलाफ इस लड़ाई को और मजबूत बनाया जा सकता है।
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