हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जिला झज्जर के सरकारी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं और लापरवाही के गंभीर मामले पर संज्ञान लिया है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग के पास पहुंची शिकायतों में आरोप है कि उपलब्ध चिकित्सा विशेषज्ञताओं के बावजूद जिला अस्पताल झज्जर और उप-मंडल अस्पताल बहादुरगढ़ से बड़ी संख्या में मरीजों को संदिग्ध परिस्थितियों में निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति को भी बेहद खराब बताया गया। आरोप है कि अधिकतर एम्बुलेंस या तो गैर-कार्यशील हैं या उनके पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
शिकायत में उप-मंडल अस्पताल बेरी की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यहां आवश्यक चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं की कमी बताई गई है। साथ ही वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी की कथित लंबी अनुपस्थिति और जन शिकायतों के प्रति उदासीनता का मुद्दा भी सामने आया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी मानकों और स्वास्थ्य नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार का हनन भी माना जाएगा, जो जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य), महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं और सिविल सर्जन झज्जर को निर्देश दिए हैं कि वे रेफरल के औचित्य, एम्बुलेंस की कार्यशीलता, अस्पतालों की आधारभूत सुविधाओं और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सहित सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह रिपोर्ट अगली सुनवाई, 20 अगस्त 2026 से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष दाखिल करनी होगी।