फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईडीएफसी बैंक धोखाधड़ी: 23 फरवरी को मिली थी शिकायत, चार गिरफ्तार; हर्षद मेहता को मानते थे आदर्श

Wed, 25 Feb 2026 12:50 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया था कि धोखाधड़ी का पता चलने के 24 घंटे के भीतर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने राज्य सरकार की पूरी राशि ब्याज समेत लौटा दी है। बैंक की ओर से 556 करोड़ 15 लाख 29 हजार रुपये की राशि सरकारी खातों में जमा कर दी गई है।
विज्ञापन
एंटी करप्शन ब्यूरो के चीफ एएस चावला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के विभिन्न खातों में 583 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी। इस मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार रात मास्टरमाइंड एयू स्मॉल बैंक की जीरकपुर शाखा के मैनेजर रिभव ऋषि समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। बुधवार को एंटी करप्शन ब्यूरो के चीफ एएस चावला ने पत्रकारवार्ता कर मामले की जानकारी दी। 

विज्ञापन


चावला ने बताया कि 23 फरवरी को पंचायत विभाग से एक पत्र मिला था जिसमें गबन की जानकारी मिली। इसके बाद एसीबी में मुकदमा नम्बर 4 दर्ज किया गया। इसमें पहले रिभव ऋषि और अभय को गिरफ्तार किया। रिभव आईडीएफसी बैंक का मैनेजर है वहीं अभय बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर था। बैंक ने सारा पैसा हरियाणा सरकार को लौटा दिया है। 

ये दोनों मुख्य आरोपी हैं। इन दोनों ने ही प्लानिंग की थी। शाम को दोनों को राउंड अप किया गया। एक स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के खाते में करीब 300 करोड़ रुपये गए थे। एयू स्माल फाइनेंस बैंक में भी पैसा गया। स्वाति सिंघला निजी कंपनी की मालिक है और अभय की पत्नी है। स्वाति के भाई अभिषेक को भी गिरफ्तार किया गया है। आज इनको कोर्ट में पेश किया जाएगा। चावला ने कहा कि ऐसा लग रहा है किसी सरकारी अधिकारी की मिलीभगत भी हो सकती है।
विज्ञापन


विज्ञापन

किस को किया गया गिरफ्तार

एसीबी ने पंचकूला के सेक्टर 20 निवासी रिभव ऋषि के अलावा मोहाली के खरड़ में रहने वाले उसके दोस्त अभय कुमार, चंडीगढ़ निवासी फर्म के निदेशक अभिषेक सिंगला और स्वाति सिंगला को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार एसीबी को पहले दिन से इन आरोपियों पर संदेह हो गया था। इसके बाद एसीबी की टीम लगातार मोहाली, जीरकपुर सहित अन्य ठिकानों पर छापे डालकर साक्ष्य जुटाने में लगी थी। चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम हरियाणा सरकार के सरकारी विभागों में तैनात इनके सहयोगियों का पता लगा रही है।

दोस्त के साथ मिलकर बनाई धोखाधड़ी की योजना

रिभव ऋषि पहले चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में बतौर मैनेजर कार्यरत था। इसके बाद वह एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में मैनेजर बन गया। सूत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार के कुछ अधिकारियों से उसकी अच्छी जान-पहचान थी। उसने खरड़ निवासी अपने दोस्त अभय कुमार के साथ मिलकर सरकारी पैसे को गबन करने की योजना बनाई।

दीदी-जीजा को शामिल किया, बोगस फर्म में पैसे ट्रांसफर किए

खरड़ निवासी अभय भी बैंक कर्मचारी रहा है। धोखाधड़ी की योजना में अभय की दीदी स्वाति सिंगला और उनके पति अभिषेक सिंगला को भी शामिल कर लिया। अभय व स्वाति के नाम पर स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट नामक की बोगस फर्म बनाई गई। आरोपियों ने इसी फर्म के जरिए हरियाणा सरकार के खातों से राशि ट्रांसफर करके गबन शुरू कर दिया।

जल्द अमीर बनने की चाहत...हर्षद मेहता को आदर्श मानते

सूत्रों के मुताबिक एसीबी की पूछताछ में सामने आया कि रिभव और अभय जल्दी बड़ी रकम कमाने के लिए काफी समय से अलग-अलग बैंकों में नौकरी करते थे। दोनोंकी दोस्ती भी इसी चक्कर में हुई थी। दोनों आरोपी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बिग बुल हर्षद मेहता को अपना आदर्श मानते हैं।

विधानसभा में सीएम ने कहा-पूरे पैसे सरकार के पास वापस आए

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में जानकारी दी कि धोखाधड़ी का पता चलने के 24 घंटे के भीतर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने राज्य सरकार की पूरी राशि ब्याज समेत लौटा दी है। बैंक की ओर से 556 करोड़ 15 लाख 29 हजार रुपये की राशि सरकारी खातों में जमा कर दी गई है। इसमें 22 करोड़ रुपये ब्याज भी शामिल है। उन्होंने सदन को बताया, वित्त सचिव अरुण गुप्ता के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित कर दी है जो जांच करेगी कि यह किसकी गलती से हुआ है। भविष्य में दोबारा ऐसा न हो इसके लिए भी समिति सुझाव देगी। हालांकि बैंक की ओर से जारी बयान में 583 करोड़ रुपये लौटाने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि बैंक की ओर से बताया गया है कि यह प्रकरण मुख्य रूप से चंडीगढ़ की शाखा का था और यह मध्यम व निम्न वर्गीय कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ। सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार बैंक के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि इस प्रकरण में शामिल कोई भी व्यक्ति चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या बैंक कर्मचारी बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई उच्चस्तरीय समिति कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, हरियाणा सरकार की कार्यप्रणाली पूरी तरह से बदल चुकी है। पहले घोटालों की फाइल को ही दबा दिया जाता था। मेरे पास ऐसी कई फाइलें हैं। सीएम के इस बयान पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा भी किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें