आयोग ने कहा कि प्रवेश-निकास, स्वागत कक्ष, गलियारे, रसोई, भंडार कक्ष, शयनगृह और स्नानगृह के प्रवेश-निकास जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी होनी चाहिए। बच्चों की निजता और गरिमा का भी ध्यान रखना होगा।
हरियाणा के बाल देखरेख संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के लिए अब सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने राज्य के सभी बाल देखरेख संस्थानों में जरूरी स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी फुटेज कम से कम छह माह तक सुरक्षित रखने की अनुशंसा की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कैमरे केवल लगे होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी कवरेज और कार्यशीलता भी सुनिश्चित करनी होगी।
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मामला मधुबन, करनाल स्थित सेफ्टी प्लेस में बच्चों से कथित मारपीट की शिकायत से जुड़ा था। शिकायत संख्या 1510/7/10/2026 की सुनवाई के दौरान पुलिस जांच और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बच्चों से मारपीट का आरोप प्रमाणित नहीं हुआ। किसी संज्ञेय अपराध का भी खुलासा नहीं हुआ। हालांकि, सुनवाई के दौरान आयोग ने संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की कमियों पर गंभीरता से ध्यान दिया।
आयोग ने पाया कि सेफ्टी प्लेस-1, मधुबन में सीसीटीवी फुटेज का बैकअप केवल एक माह तक रखा जा रहा था। इसे अपर्याप्त मानते हुए छह माह की भंडारण व्यवस्था की जरूरत बताई गई।
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आयोग ने कहा कि प्रवेश-निकास, स्वागत कक्ष, गलियारे, रसोई, भंडार कक्ष, शयनगृह और स्नानगृह के प्रवेश-निकास जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी होनी चाहिए। बच्चों की निजता और गरिमा का भी ध्यान रखना होगा।
पूरे प्रदेश में होगी समीक्षा
आयोग ने व्यवस्था को केवल मधुबन तक सीमित न रखते हुए बाल गृह, खुले आश्रय गृह, निरीक्षण गृह, विशेष गृह, सेफ्टी प्लेस और विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसियों समेत सभी बाल देखरेख संस्थानों में लागू करने की अनुशंसा की है। उपायुक्तों से जिला-वार अनुपालन रिपोर्ट ली जाएगी और महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य स्तरीय रिपोर्ट आयोग को देगा। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2027 को होगी।