हाईकोर्ट ने कहा था कि जब कोई कर्मचारी एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुका है और उक्त पद का कार्य मौजूद है, तो राज्य का यह कर्तव्य है कि वह एक पद सृजित करे, ताकि कर्मचारी को सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सके।
दो दशक तक अस्थाई तौर पर सेवा दे चुके कर्मचारियों को हरियाणा सरकार नए साल से पहले नियमित करने का तोहफा देने जा रही है। उन्हें नियमित करने के लिए कैडर पदों के सृजन को 28 नवंबर को मुख्य सचिव ने मंजूरी दे दी है। साथ ही वित्त विभाग ने भी अपेक्षित मंजूरी दे दी है। दो सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी के साथ ही वित्तीय लाभ भी दिया जाएगा।
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कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता दोबारा याचिका दाखिल कर सकते हैं और दोषी अधिकारी को जेब से 50 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। इस मामले में आशीष शर्मा व अन्य ने अवमानना याचिका दाखिल करते हुए राज्य में दो दशकों से अधिक समय से कार्यरत सभी अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने के हाईकोर्ट के 13 मार्च को जारी आदेश को लागू नहीं करने के लिए मुख्य सचिव हरियाणा के खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश मांगे थे।
हाईकोर्ट ने मार्च माह में यमुना नगर निवासी ओम प्रकाश व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा था कि एक बार राज्य सरकार ने अस्थायी कर्मचारियों को उस पद पर सेवा जारी रखने की अनुमति दे दी तो यह नहीं कहा जा सकता कि संबंधित पद के लिए कोई नियमित कार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई कर्मचारी एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुका है और उक्त पद का कार्य मौजूद है, तो राज्य का यह कर्तव्य है कि वह एक पद सृजित करे, ताकि कर्मचारी को सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सके।
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हाईकोर्ट ने कहा था एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते, राज्य को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखना चाहिए, न कि ऐसा निर्णय लेने चाहिए जिससे कर्मचारी के नियमितीकरण के दावे खारिज किया जा सके। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने सरकार की 1 अक्टूबर, 2003 की नीति के तहत सेवाओं को नियमित करने की मांग की थी। सरकार ने पहले दावा किया था कि याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित करने के लिए राज्य के पास कोई स्वीकृत पद नहीं है। इस पर हाई कोर्ट ने अपने मार्च के आदेशों में राज्य को उचित पद सृजित करने के लिए कहा था।