हरियाणा सरकार ने अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने और सुनियोजित आवासीय विकास को बढ़ावा देने के लिए नई टाउन प्लानिंग स्कीम लागू की है। यह योजना राज्य के 66 नगर परिषदों और नगर समितियों में लागू होगी, जहां अभी कंट्रोल्ड एरिया के प्रावधान लागू नहीं हैं।
इस योजना के दायरे में भिवानी, फतेहाबाद, जींद, कैथल, सिरसा, झज्जर, नारनौल, हांसी, चरखी दादरी, नूंह, गोहाना, समालखा, अंबाला सदर समेत कई छोटे शहर शामिल हैं। इस योजना को 28 जुलाई को हरियाणा कैबिनेट ने मंजूरी दी थी, जबकि 30 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई।
राज्य सरकार के मुताबिक इन शहरों में अब तक आवास की जरूरत काफी हद तक अवैध कॉलोनियों से पूरी हो रही थी। नई योजना से नियोजित तरीके से कॉलोनियां विकसित होंगी, लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत कॉलोनी विकसित करने के लिए कम से कम 5 एकड़ जमीन जरूरी होगी, अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है। कॉलोनी तक पहुंच के लिए कम से कम 33 फीट चौड़ी मौजूदा सड़क होना अनिवार्य होगा।
नियमों के तहत प्लॉट का आकार 50 से 250 वर्गमीटर के बीच होगा। कुल प्लॉटों में से कम से कम 50% प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे। कुल क्षेत्रफल का अधिकतम 65% हिस्सा आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। सिर्फ 5% क्षेत्र में ही व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। 7.5% क्षेत्र पार्क और खुली जगह के लिए आरक्षित रहेगा। पार्क एक ही स्थान पर बनाया जाएगा और उसमें कोई सार्वजनिक उपयोगिता भवन नहीं बनेगा।
आवासीय योजनाओं में पर्यावरण नियम होंगे सख्त
नई आवासीय योजनाओं के लिए कई नए प्रावधान तय किए गए हैं। अब कम से कम 50 प्रतिशत स्ट्रीट लाइटें सोलर ऊर्जा से चलानी होंगी। ठोस कचरे के पृथक्करण के लिए 50 वर्गमीटर जगह आरक्षित करनी होगी। एसटीपी लगाकर उपचारित पानी का 100 प्रतिशत उपयोग पार्कों और हरित क्षेत्रों में करना अनिवार्य होगा। सड़क के 20 प्रतिशत हिस्से को जल पुनर्भरण योग्य बनाना और वर्षा जल संचयन करना होगा। योजनाओं के लिए स्क्रूटनी फीस 10 रुपये प्रति वर्गमीटर होगी। डेवलपर को सुरक्षा के लिए या तो बिक्री के लिए उपलब्ध 15 प्रतिशत जमीन बैंक के पास गिरवी रखनी होगी या फिर विकास कार्यों की लागत का 25 प्रतिशत बैंक गारंटी के रूप में जमा करना होगा।
सभी परियोजनाओं को पांच साल में पूरा करना होगा
योजना के तहत बिल्डर को सभी परियोजनाओं को 5 वर्ष के भीतर पूरा करना होगा। विशेष परिस्थितियों में शुल्क देकर 2 वर्ष का अतिरिक्त समय मिल सकेगा। परियोजना पूरी होने के बाद भी डेवलपर को 5 वर्ष तक सड़क, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव करना होगा, इसके बाद इन्हें स्थानीय निकाय को सौंपा जाएगा।
इसके अलावा बिल्डर को सड़क, स्ट्रीट लाइट, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, पार्क, पौधारोपण और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं अपने खर्च पर विकसित करनी होंगी। साथ ही, योजना क्षेत्र का 5% हिस्सा मुफ्त में नगर निकाय को सामुदायिक सुविधाओं के लिए देना होगा या स्वयं विकसित करना होगा, जिसका खर्च निवासियों से नहीं लिया जा सकेगा।इसके अलावा, प्रत्येक परियोजना का एचआरईआरए में पंजीकरण अनिवार्य होगा। पंजीकरण से पहले किसी भी प्रकार की बुकिंग, बिक्री या विज्ञापन की अनुमति नहीं होगा।
इन शहरों में लागू होगी योजना
यह स्कीम भिवानी, फतेहाबाद, जींद, कैथल, नारनौल, सिरसा, झज्जर, अंबाला सदर, गोहाना, हांसी, चरखी दादरी, टोहाना, नरवाना, सफीदों, इंद्री, असंध, शाहाबाद, रतिया, ऐलनाबाद, उकलाना, जुलाना समेत 66 नगर परिषद और नगर समितियों में लागू होगी।