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जीत का इनाम: हरियाणा के भाजपा प्रभारी सतीश पूनिया जाएंगे राज्यसभा, शीर्ष नेतृत्व के फैसले का क्या है आधार

Fri, 05 Jun 2026 08:22 AM IST
Nivedita आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भाजपा के भीतर सतीश पूनिया को संगठन और चुनाव प्रबंधन में दक्ष नेता माना जाता है। हरियाणा में विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में मिली सफलता के बाद राज्यसभा की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक कद में और बढ़ोतरी के संकेत दे रही है।
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satish punia - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में विधानसभा से लेकर निगम चुनाव तक भाजपा की जीत अहम भूमिका निभाने वाले पार्टी के प्रभारी सतीश पूनिया को आलाकमान ने बड़ा राजनीतिक पुरस्कार दिया है। पूनिया को राजस्थान से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया गया है। उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। 
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भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का यह फैसला हरियाणा में उनके सफल संगठनात्मक प्रबंधन और चुनावी रणनीति को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है।
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जुलाई 2024 में बने थे प्रदेश प्रभारी

भाजपा ने सतीश पूनिया को हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जुलाई 2024 में राज्य का प्रभारी नियुक्त किया था। उस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस लाने की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि दस वर्षों की सत्ता विरोधी लहर के कारण भाजपा के लिए वापसी आसान नहीं होगी। हालांकि पूनिया के नेतृत्व में पार्टी ने न केवल सत्ता में वापसी की, बल्कि रिकॉर्ड सीटें जीतकर अपने दम पर सरकार बनाते हुए हैट्रिक भी दर्ज की।

पार्टी को हर स्तर पर किया मजबूत  

विधानसभा चुनाव के बाद भी हरियाणा में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत बना रहा। हाल ही में हुए नगर निगम चुनावों में भी पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। संगठनात्मक स्तर पर सतीश पूनिया लगातार सक्रिय रहे और प्रदेश भर में कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों की बैठकों के जरिए पार्टी को मजबूत करने का काम किया। उनके दिशा-निर्देशों में संगठन ने बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत की।

जाट प्रतिनिधित्व को मजबूती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा भेजने के पीछे पार्टी की सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों की रणनीति भी जुड़ी हुई है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले सतीश पूनिया जाट समुदाय से आते हैं। ऐसे में उनकी उम्मीदवारी को राजस्थान की राजनीति में जाट प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
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