-चीफ फायर आफिसर पद से वंचित रहे पूर्व अधिकारी की याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश
-वायु सेना से सेवा मुक्त होने के बाद हरियाणा में फायर स्टेशन ऑफिसर के तौर पर किया था ज्वाइन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वह पूर्व फायर आफिसर इलाम सिंह चौहान को दो लाख रुपये मुआवजा दे। याची को चीफ फायर आफिसर के पद से सिर्फ इस आधार पर वंचित कर दिया गया था कि उनके पास साइंस में स्नातक डिग्री नहीं थी, जबकि यह योग्यता केवल वांछनीय थी, अनिवार्य नहीं। पूर्व वायुसेना अधिकारी इलाम सिंह चौहान ने 1989 में सेवानिवृत्त होने के बाद हरियाणा सरकार में फायर स्टेशन आफिसर के तौर पर 1990 में नियुक्ति पाई थी। इसके बाद विभिन्न पदों पर कार्य किया और 1998 में फायर आफिसर पद पर पदोन्नत हुए। उन्होंने चीफ फायर आफिसर पद पर पदोन्नति की मांग की लेकिन उन्हें योग्यता की आड़ में नकारा गया। सरकार ने तर्क दिया कि इस पद के लिए साइंस में स्नातक डिग्री अनिवार्य थी, जबकि याचिकाकर्ता के पास बीए आनर्स डिग्री थी। कोर्ट ने यह तर्क खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा उल्लेखित दिशा-निर्देशों में साइंस की डिग्री को सिर्फ वांछनीय बताया गया है, न कि अनिवार्य। याची को गलत तरीके से पदोन्नति से वंचित किया गया। जस्टिस विनोद एस भारद्वाज की एकल पीठ ने कहा कि कोर्ट याचिकाकर्ता को चीफ फायर आफिसर पद पर पदोन्नत करने का आदेश नहीं दे सकती क्योंकि वह पद न तो सेवा नियमों के अंतर्गत था और न ही कभी भरा गया, लेकिन याचिकाकर्ता को गलत कारणों से अयोग्य ठहराया गया, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा और कानूनी लड़ाई झेलनी पड़ी। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ता को दो लाख का मुआवजा दे।