हरियाणा सरस्वती हेरिटेज विकास बोर्ड ने लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूज़ियम से ग्यारहवीं सदी की प्राचीन मां सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह प्रतिमा मूल रूप से मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर की है, जिसे औपनिवेशिक काल (लगभग 1886–1891) में अंग्रेजों द्वारा इंग्लैंड ले जाया गया था।बोर्ड के उपाध्यक्ष धूमन सिंह किरमच ने इस संबंध में जानकारी दी।
किरमच ने बताया कि यह प्रतिमा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की है। हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला परिसर को प्राचीन सरस्वती वाग्देवी मंदिर मानते हुए हिन्दू समाज को पूजा का अधिकार दिया है। इस आदेश के बाद प्रतिमा को वापस लाने की मांग और अधिक प्रासंगिक हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार विदेशों से प्राचीन धरोहरों को वापस लाने का अभियान चला रही है।
पिछले कुछ वर्षों में कई दुर्लभ मूर्तियां और कलाकृतियां भारत लाई गई हैं, जिससे इस प्रयास को बल मिला है। हरियाणा सरस्वती बोर्ड ने इस विषय पर मध्य प्रदेश सरकार से संपर्क किया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया है। बोर्ड का लक्ष्य इस प्रतिमा को भारत लाकर सरस्वती सभ्यता से जुड़े क्षेत्रों में प्रदर्शित करना है। अंततः इसे हरियाणा में स्थापित सरस्वती संग्रहालय में प्रतिष्ठित किया जाएगा।