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कौन हैं डॉ. सुधा यादव?: मोदी के कहने पर राजनीति में आईं, पहला चुनाव जीता; कारगिल युद्ध में बलिदान हुए थे पति

Tue, 13 Oct 2026 01:03 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

महेंद्रगढ़ की पूर्व सांसद सुधा यादव कर्नाटक की राज्यपाल नियुक्त की गई हैं। एक महीने पहले बेटे सिद्धार्थ को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में जिम्मेदारी मिली थी। डॉ सुधा यादव के पति कारगिल युद्ध में बलिदान हुए थे। डॉ सुधा यादव ने मोदी के कहने पर चुनाव लड़ा था। पहली बार में ही उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी।
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Former Haryana MP Sudha Yadav - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल किया। इसमें हरियाणा भाजपा की वरिष्ठ नेता और महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र की पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति को हरियाणा के पुराने भाजपाइयों को महत्व देने के संदर्भ में देखा जा रहा है।
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खास बात यह है कि करीब एक महीने पहले ही उनके बेटे को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली थी। मां को राज्यपाल और बेटे को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने को दक्षिण हरियाणा में पार्टी के अपना कुनबा मजबूत करने से जोड़ कर देखा जा रहा है। 

इसके अलावा हरियाणा से राज्यसभा सदस्य रहे दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है। सुधा यादव का राजनीतिक सफर 1999 में शुरू हुआ था। कारगिल युद्ध के दौरान उनके पति और सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट रहे सुखबीर सिंह यादव बलिदान हो गए थे। 
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इसके बाद सुधा यादव राजनीति में आईं। 1999 में महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राव इंद्रजीत (जो वर्तमान में भाजपा में हैं और केंद्रीय राज्य मंत्री हैं) को हराया था। हालांकि उसके बाद उन्हें लगातार दो लोकसभा चुनाव (महेंद्रगढ़ व गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से) में हार का सामना करना पड़ा। 

चुनावी हार के बावजूद भाजपा संगठन में उनकी भूमिका बनी रही। वह पार्टी के संसदीय बोर्ड में शामिल हुईं। सुषमा स्वराज के बाद यह पद संभालने वाली दूसरी महिला बनीं। मूल रूप से रेवाड़ी के गांव मोतला कलां की रहने वाली डॉ. सुधा यादव का अहीरवाल क्षेत्र से गहरा जुड़ाव है। वह राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

मोदी के कहने पर राजनीति में आईं और लड़ा चुनाव
डॉ. सुधा यादव की हरियाणा की राजनीति में एंट्री किसी तय राजनीतिक योजना का हिस्सा नहीं थी। 1999 में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को महेंद्रगढ़ सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह के सामने मजबूत उम्मीदवार की तलाश थी। 

 

कई नेताओं के नाम चर्चा में थे लेकिन तत्कालीन प्रदेश प्रभारी नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व के सामने सुधा यादव का नाम रखा। उस समय सुधा यादव राजनीति में आने के लिए तैयार नहीं थीं। पति को खोने के बाद उनके सामने बच्चों की परवरिश और परिवार को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी थी। इसलिए राजनीति उनकी प्राथमिकता में नहीं थी। 

भाजपा नेताओं ने जब संपर्क किया तो सुधा यादव ने चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया। पार्टी नेतृत्व के समझाने के बाद नरेंद्र मोदी ने उनसे फोन पर बात की और कहा कि जिस तरह परिवार को उनकी जरूरत है उसी तरह देश को भी उनकी जरूरत है। मोदी के कहने पर सुधा यादव चुनाव लड़ने के लिए राजी हुईं।

तमिलनाडु में अदला-बदली, चार नए चेहरे
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु और ओम प्रकाश माथुर को केरलम का राज्यपाल नियुक्त किया है। ब्रजमोहन राम को ओडिशा और दल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। माथुर इससे पहले सिक्किम के राज्यपाल थे। अब उनकी जगह दुष्यंत गौतम को जिम्मेदारी दी गई है। 

 
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आर्लेकर केरलम के राज्यपाल थे और अब तमिलनाडु का कार्यभार संभालेंगे। इस तरह दो राज्यों में मौजूदा राज्यपालों को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि चार राज्यों में नए चेहरों की नियुक्ति हुई है। इन नियुक्तियों के प्रभावी होने की तारीख संबंधित राज्यपालों के पदभार ग्रहण करने के साथ तय होगी।
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