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कर्मचारी की गलती के बिना हुए अतिरिक्त भुगतान की सेवानिवृत्ति के बाद नहीं हो सकती वसूली : हाईकोर्ट

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-हाईकोर्ट ने वसूल की गई राशि को 8 सप्ताह के भीतर लौटाने का दिया आदेश
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-केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ दाखिल की थी अपील


अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी कर्मचारी के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद उसका वेतन पुनः निर्धारण कर अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली करना, यदि वह भुगतान कर्मचारी की किसी धोखाधड़ी के बिना हुआ हो तो वह कानूनन अस्वीकार्य है। चरखी दादरी निवासी याचिकाकर्ता विरेंद्र पाल ने बताया कि वह 31 जुलाई 2016 को सेवानिवृत्त हुए। बाद में लेखा विभाग ने पाया कि उनकी वेतन निर्धारण में त्रुटि हुई थी और उनका वेतन 11,840 की बजाय 11,170 होना चाहिए था। इस आधार पर विभाग ने उनका वेतन पुनः निर्धारण कर 1,75,274 की अधिक भुगतान राशि की वसूली उनके पेंशन लाभों से कर ली। याचिकाकर्ता ने इस वसूली को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में चुनौती दी लेकिन ट्रिब्यूनल ने विभाग की कार्रवाई को सही ठहराया। हालांकि देरी से जारी पेंशन पर ब्याज देने का निर्देश दिया। इसपर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति के बाद वसूली करना अनुचित है जबकि उन्होंने कोई गलत जानकारी या धोखाधड़ी नहीं की। भारत सरकार ने कहा कि वेतन निर्धारण में गलती विभागीय थी और चूंकि यह सार्वजनिक धन था। अतः अधिक भुगतान की गई राशि की वापसी उचित थी। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वसूल की गई राशि आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को लौटाई जाए।
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