अलग-अलग जॉब रोल के हिसाब से तैयार होंगे पाठ्यक्रम
सरकार ने अभी इस कोर्स का नाम तय नहीं किया है। संस्थानों को वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री से जुड़े अलग-अलग जॉब रोल के हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे। ये पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप और राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी), संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल या केंद्र सरकार से अधिकृत एजेंसी से प्रमाणित होने चाहिए।
प्रशिक्षण के साथ नौकरी मिलने तक रहेगी निगरानी
योजना की खास बात यह है कि सरकार केवल प्रशिक्षण शुरू करने में सहायता नहीं देगी। राशि तीन चरणों में मिलेगी। प्रशिक्षण शुरू होने पर 30 फीसदी, सफल प्रमाणन के बाद 40 फीसदी और प्रशिक्षित युवाओं के प्लेसमेंट के आधार पर शेष 30 फीसदी राशि दी जाएगी। प्रमाणन के बाद प्रशिक्षित युवाओं की तीन महीने की अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट का भौतिक सत्यापन भी होगा। यानी संस्थानों को युवाओं को केवल प्रशिक्षित ही नहीं बल्कि रोजगार योग्य बनाने पर भी ध्यान देना होगा।
भविष्य में बढ़ सकती है मांग
यह योजना हरियाणा की 2024 की पंजीकृत वाहन स्क्रैप एवं रीसाइक्लिंग सुविधा प्रोत्साहन नीति से जुड़ी है। सरकार प्रदेश में पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग इकाइयों को बढ़ावा दे रही है। हरियाणा में वाहन स्क्रैपिंग के 26 पंजीकृत केंद्र हैं। इनमें 7 बंद संचालित नहीं हैं। इसके अलावा इनमें छोटे कारोबारियों की संख्या ज्यादा हैं। पंजाब 5, राजस्थान 3 और हिमाचल 2 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र हैं। इन इकाइयों के बढ़ने से पुराने वाहनों के वैज्ञानिक निस्तारण, उपयोगी धातु और अन्य सामग्री की रिकवरी तथा रीसाइक्लिंग का काम बढ़ने की संभावना है। इसके साथ डिस्मेंटलिंग, मशीन संचालन, वाहन पुर्जों की छंटाई, सामग्री की रिकवरी और रीसाइक्लिंग जैसे कामों के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत भी बढ़ सकती है। नई कौशल योजना इसी संभावित मांग के लिए पहले से मानव संसाधन तैयार करने की कोशिश है।