गुरुग्राम व नूंह में निजी कंपनी इलेवन पावर को बिजली वितरण का लाइसेंस देने पर हरियाणा में आर-पार की जंग छिड़ गई है। फैसले के विरोध में बुधवार रात 10 बजे से बिजलीकर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई।
करीब 40 हजार कर्मचारियों के रोजगार पर संकट के बीच सरकार ने छुट्टी पर गए 25 अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल ड्यूटी पर लौटने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश व राजस्थान से तकनीकी स्टाफ मांगा गया है। हड़ताल में शामिल होने या दूसरे कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
इस बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, ऊर्जा मंत्री अनिल विज और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के फैसले के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोलने का निर्णय लिया गया। सीएम सैनी ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के साथ है। सरकार आयोग के आदेश पर स्टे लेने के साथ पांच दिन के भीतर विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर करने की तैयारी करेगी। हालांकि, कर्मचारियों का सवाल है कि जब ऊर्जा मंत्री विज खुद निजीकरण के विरोध में होने की बात कह रहे हैं, तो सरकार निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले को वापस क्यों नहीं लेती। उनकी विभिन्न यूनियनों से बनी संघर्ष समिति ने फैसले की वापसी होने तक ऊर्जा मंत्री विज के साथ कोई भी बैठक करने से मना कर दिया है। समिति का कहना है कि पहले फैसला बदला जाए, तभी बातचीत का ठोस आधार बनेगा।
मांगे गए स्टाफ में जेई से लेकर शिफ्ट अटेंडेंट तक
हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए बिजली विभाग ने वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था शुरू की है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को पत्र लिखा है। पहले चरण में पंजाब और हिमाचल से तकनीकी कर्मचारी मांगे गए हैं जबकि राजस्थान और उत्तर प्रदेश को जरूरत पड़ने पर स्टाफ उपलब्ध कराने के लिए अलर्ट किया गया है। मांगे गए कर्मचारियों में जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट फोरमैन, लाइनमैन, असिस्टेंट लाइनमैन, सब-स्टेशन अटेंडेंट, असिस्टेंट सब-स्टेशन अटेंडेंट और शिफ्ट अटेंडेंट शामिल हैं।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम ने पंचकूला और रोहतक के मुख्य अभियंताओं को हड़ताल की अवधि के लिए समग्र प्रभारी बनाया है। निगम के सभी 10 ऑपरेशन सर्किलों की निगरानी संबंधित मुख्य अभियंता करेंगे। सब-स्टेशनों पर शिफ्ट ड्यूटी जारी रखने और बिजली प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय किया जाएगा। संभावित भीड़ की गतिविधियों की वीडियोग्राफी के लिए भी इंतजाम करने के निर्देश हैं।
ग्राम सचिवों, पटवारियों को भी जिम्मेदारी दी जा रही
सरकार ने बिजली व्यवस्था में व्यवधान रोकने के लिए दूसरे विभागों के कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाने की तैयारी की है। ग्राम सचिवों, पटवारियों और तकनीकी कर्मचारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी जा रही है। राज्य परिवहन विभाग को भी अलर्ट रहने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर बसों के जरिए कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर भेजा जा सके।
छुट्टी पर रोक, कार्रवाई की चेतावनी
बिजली निगमों ने हड़ताल के दौरान छुट्टी पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। केवल असाधारण परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी कारण दर्ज कर छुट्टी मंजूर कर सकेंगे। हड़ताल में शामिल होने या दूसरे कर्मचारियों को ड्यूटी करने से रोकने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जानबूझकर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं करेंगे
संघर्ष समिति के सदस्य और ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के महासचिव राजेंद्र राणा ने कहा कि राज्य की सभी सब-डिवीजनों में समानांतर लाइसेंस देने के आदेश की प्रतियां जलाई गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी जानबूझकर बिजली आपूर्ति बाधित नहीं करेंगे और हड़ताल के दौरान अस्पतालों की बिजली चालू रखेंगे। स्वास्थ्य विभाग ने भी अस्पतालों में सेवाएं निर्बाध रखने के निर्देश दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने सिविल सर्जनों और प्रधान चिकित्सा अधिकारियों को जनरेटर, बिजली बैकअप और 24 घंटे इलेक्ट्रीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। प्रत्येक संस्थान में नोडल अधिकारी नियुक्त होगा। वैक्सीन और अन्य संवेदनशील चिकित्सा सामग्री की कोल्ड चेन बनाए रखने, एंबुलेंस उपलब्ध रखने और जरूरत पड़ने पर निजी अस्पतालों से समन्वय के निर्देश भी दिए गए हैं।