अमर उजाला एक्सक्लूसिव
वेतनमान कम होने से हरियाणा में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं करते ड्यूटी ज्वाइन
कई जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में विशेषज्ञ डाॅक्टरों की बेहद कमी है। कई अस्पतालों में यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, त्वचा विशेषज्ञ नहीं है। सबसे जरूरी स्त्री और बाल रोग विशेषज्ञ भी स्वीकृत पदों के अनुपात में नहीं हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के नहीं होने के पीछे एक बड़ी वजह हरियाणा के डॉक्टरों का वेतन कम होना है। राज्य के डॉक्टरों को सैलरी-भत्ता दिल्ली-बिहार व केंद्र के डॉक्टरों से भी कम मिलता है। हरियाणा में डॉक्टरों को पूरे कॅरिअर में तीन बार एसीपी (एश्योर्ड कॅरिअर प्रोगेसन) का लाभ मिलता है जबकि दिल्ली-बिहार, उत्तराखंड व केंद्र के डॉक्टरों को चार बार एसीपी का लाभ मिलता है। डॉक्टरों की एसोसिएशन ने इस मुद्दे को कई बार उठाया। मगर राज्य सरकार ने मांगों को स्वीकार नहीं किया है।
हरियाणा में डॉक्टरों को पांच साल, 10 साल और फिर 15 साल में एसीपी का लाभ मिलता है। एसीपी का लाभ मिलने पर डॉक्टरों के वेतन व ग्रेड पे पर बढ़ोतरी होती है। वहीं, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड में डॉक्टरों को पूरे कॅरिअर में चार बार एसीपी का लाभ मिलता है। इन डॉक्टरों को कॅरिअर के चार साल, फिर 9 साल, 13 साल और 20 साल पर एसीपी का लाभ मिलता है।
इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है कि दिल्ली व बिहार के डॉक्टरों को वेतन जो चार साल में मिलता है, उस वेतन के लिए हरियाणा के डॉक्टरों को एक साल तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि पंजाब और हरियाणा के डॉक्टरों का वेतनमान लगभग समान है।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) के अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया बताते हैं कि पिछले साल सरकार व एसोसिएशन की बीच हुई बैठक में राज्य सरकार ने वेतनवृद्धि मंजूर कर दी थी मगर उस पर अब तक अमल नहीं हुआ है। सीएमओ में फाइल धूल फांक रही है। निजी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को दो से चार लाख तक वेतन दिया जाता है और वहां तय मरीज ही देखने पड़ते हैं। सरकार डॉक्टरों की भर्तियां तो निकाल रही है मगर कितने स्पेशलिस्ट डॉक्टर ज्वाइन कर रहे हैं, ये देखने वाली बात है। राज्य के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देनी हैं तो डॉक्टरों के वेतन में वृद्धि भी करनी होगी। इस बारे में हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि डॉक्टरों के वेतन में वृद्धि को लेकर सरकार पॉजिटिव है। इस बारे में चर्चा भी हो चुकी है। जल्द ही अच्छा होगा।
शुरुआत में बराबर, मध्य कॅरिअर में पीछे रह जाते हैं डॉक्टर
शुरुआत में दिल्ली-बिहार के डॉक्टरों के बराबर ही हरियाणा के डॉक्टरों को 56 हजार बेसिक सैलरी मिलती है। पांच साल में पहली बार एसीपी के लाभ के तहत हरियाणा के डॉक्टरों को 67 हजार 700 बेसिक सैलरी मिलती है तो दिल्ली-बिहार के डॉक्टरों को चार साल में बेसिक सैलरी 67 हजार 700 हो जाती है। हरियाणा में दस साल में दूसरी बार एसीपी के लाभ पर बेसिक सैलरी 78 हजार 800 रुपये पहुंच जाती है जबकि बिहार व दिल्ली के डॉक्टरों की नौ साल में ही बेसिक सैलरी 78 हजार 800 रुपये हो जाती है। हरियाणा के डॉक्टरों को तीसरी बार एससीपी का लाभ 15 साल बाद मिलता है। इससे उनकी बेसिक सैलरी एक लाख 23 हजार 100 होती है। वहीं, दिल्ली-बिहार के डॉक्टरों की बेसिक सैलरी 13 साल में एक लाख 23 हजार होती है। इसके बाद हरियाणा के डॉक्टरों को एसीपी का लाभ नहीं मिलता जबकि दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के कॅरिअर के 20वें साल में चौथी बार एसपीपी का लाभ मिलता है। इससे इनकी बेसिक सैलरी एक लाख 82 हजार पहुंच जाती है।
इन स्थानों में नहीं हैं विशेषज्ञ डॉक्टर
करनाल के नागरिक अस्पताल में 55 स्वीकृत पदों में से केवल 43 डॉक्टर कार्यरत हैं। यहां बाल रोग, नेत्र रोग और महिला रोग विशेषज्ञों की कमी है। कुरुक्षेत्र के नागरिक अस्पताल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की ओपीडी चार साल से बंद है। इसके साथ ही यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट भी नहीं है। कैथल के नागरिक अस्पताल में भी बाल रोग, नेत्र रोग और महिला रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है। यमुनानगर के अस्पताल में चर्म रोग, हृदयरोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, मानसिक रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद लंबे समय से खाली हैं। पूरे जिले में केवल दो स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं। सिजेरियन डिलीवरी के लिए निजी डॉक्टरों को हायर किया गया है। रेवाड़ी के सिविल अस्पताल में 5 साल से न्यूरो सर्जन नहीं है। कोसली अस्पताल में एक साल से गायनी में चिकित्सक नहीं है। शिशु रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। झज्जर के सिविल अस्पताल में दो साल से फिजिशियन का पद खाली है। इसके अलावा पिछले एक साल से बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं है। डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इसके लिए 300 से 400 रुपये केवल डॉक्टर के देखने की फीस होती है।