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Chandigarh-Haryana News: करंट से दिव्यांग युवक की मौत, मानवाधिकार आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के दिए निर्देश

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आयोग ने उपायुक्त को पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर रिपोर्ट देने को कहा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सड़क किनारे खुले में लगे ट्रांसफार्मर से करंट लगने से दिव्यांग युवक की मौत पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इस मामले को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करार देते हुए बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीड़ित परिवार को तात्कालिक अंतरिम मुआवजा प्रदान करने को कहा है।
शिकायतकर्ता रणबीर ने 11 जनवरी को शिकायत दी थी कि रजनीश उस समय हादसे का शिकार हुए जब वह बिना फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड वाले ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ गए। उन्हें तुरंत फिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने कहा कि यह घटना अवसंरचना सुरक्षा में गंभीर खामियों और संबंधित अधिकारियों की कर्तव्यहीनता को दर्शाती है। संबंधित ट्रांसफार्मर को उच्च आवागमन वाले पैदल क्षेत्र में बिना किसी अवरोध या चेतावनी संकेतक के लगाया गया था, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। आवश्यक निरीक्षण, रख-रखाव और सुरक्षात्मक उपायों का अभाव प्रशासनिक विफलता को दिखाता है। आयोग ने कहा कि पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना है और राज्य की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करे। 81 फीसदी दिव्यांग रजनीश की मृत्यु, सार्वजनिक यूटिलिटी की लापरवाह और उपेक्षा के कारण हुई, जो कि एक रोकी जा सकने वाली और अस्वीकार्य घटना है।
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इस मामले की सुनवाई में मानवाधिकार आयोग ने यह भी कहा है कि ऐसे खतरे वाले ट्रांसफार्मरों के लिए उपाय खोजने होंगे। साथ ही सभी ट्रांसफार्मरों के चारों ओर उपयुक्त फेंसिंग या बैरिकेडिंग, स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले चेतावनी बोर्ड और खतरे के संकेत लगाना, ओवरहेड क्लीयरेंस की पुष्टि और लटके हुए तारों को हटाना, नियमित निरीक्षण और रखरखाव का रिकॉर्ड, ऐसी दुर्घटनाओं की स्थिति में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली अपनाने के लिए गाइड लाइंस बनाने के निर्देश दिए हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग ने पुलिस आयुक्त सोनीपत से भी यह पूछा गया है कि क्या इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज हुई है और आपराधिक लापरवाही के लिए किस स्तर तक जांच हुई है। वहीं, उपायुक्त सोनीपत को पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। अगली सुनवाई 30 जुलाई पूर्ण आयोग के समक्ष निर्धारित की गई है।
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