हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जीटी रोड, नथूपुर मोड़ (सोनीपत) पर सड़क किनारे खुले में लगे ट्रांसफार्मर से करंट लगने के कारण 81% दिव्यांग युवक रजनीश की दर्दनाक मौत पर गंभीर संज्ञान लिया है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इस मामले को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करार देते हुए बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग आयोग ने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए है रेखांकित किया है कि राज्य की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करे।
दिव्यांग रजनीश की मृत्यु, सार्वजनिक यूटिलिटी की लापरवाह स्थापना और उपेक्षा के कारण हुई, जो कि एक रोकी जा सकने वाली और अस्वीकार्य घटना है। शिकायतकर्ता रणबीर की ओर से दायर शिकायत के अनुसार, 11 जनवरी 2025 को रजनीश उस समय हादसे का शिकार हुए जब वह बिना फेंसिंग और चेतावनी बोर्ड वाले ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ गए। उन्हें तुरंत फिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित कार्यवाहियों की अनुशंसा की है।
जांच और जवाबदेही
बिजली विभाग एक स्वतंत्र और समयबद्ध जांच करेगा, ताकि चूक की पहचान की जा सके और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सके। जिन अधिकारियों द्वारा ट्रांसफार्मर को बिना सुरक्षा प्रावधानों के स्थापित किया गया, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक/कानूनी कार्रवाई की जाए।
मुआवजा और सहायता
राज्य सरकार पीड़ित परिवार को तात्कालिक अंतरिम मुआवजा प्रदान करें, ताकि राज्य उत्तरदायित्व और पुनरावृत्ति न्याय के सिद्धांतों को लागू किया जा सके।
रोकथाम के उपाय और सार्वजनिक सुरक्षा
जिलेवार स्तर पर सार्वजनिक या आवासीय क्षेत्रों में लगे सभी ट्रांसफार्मरों और उच्च वोल्टेज उपकरणों का ऑडिट किया जाए, जिसमें निम्नलिखित शामिल हों
सभी ट्रांसफार्मरों के चारों ओर उपयुक्त फेंसिंग या बैरिकेडिंग
स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले चेतावनी बोर्ड और खतरे के संकेत लगाना
ओवरहेड क्लीयरेंस की पुष्टि और लटके हुए तारों को हटाना
नियमित निरीक्षण और रखरखाव का रिकॉर्ड
ऐसी दुर्घटनाओं की स्थिति में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि पुलिस आयुक्त सोनीपत से भी यह पूछा गया है कि क्या इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज हुई है और आपराधिक लापरवाही के लिए किस स्तर तक जांच हुई है। वहीं, उपायुक्त सोनीपत को पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर रिपोर्ट देने को कहा गया है| अगली सुनवाई 30 जुलाई 2025 को पूर्ण आयोग के समक्ष निर्धारित की गई है।