हरियाणा में बरसात ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। रविवार को बरसात से मंडियों में रखा धान भीग गया है। जीटी बेल्ट में बारिश ने अनाज मंडियों में धान को नुकसान पहुंचाया है। करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, यमुनानगर और पानीपत की मंडियों में खुले में पड़ा धान बारिश में भीग गया।
करनाल: 30 हजार मीट्रिक टन धान को नुकसान की आशंका
करनाल जिले की अनाज मंडियों में बारिश से धान को नुकसान पहुंचने की आशंका है। मंडियों में खुले में पड़ा करीब 45 हजार मीट्रिक टन धान बारिश की चपेट में आया है। इसमें से करीब 30 हजार मीट्रिक टन धान को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। बारिश के बाद किसानों के सामने धान को सुखाने की चुनौती खड़ी हो गई है। मंडियों में खरीद जारी है, लेकिन धान को सुखाने और उसकी नमी कम करने में समय लग सकता है।
जिले में अब तक 2.44 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 1.20 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई है। 48,043.60 मीट्रिक टन धान का उठान किया जा चुका है, जबकि 72,428.60 मीट्रिक टन धान मंडियों में पड़ा हुआ है। उठान की रफ्तार धीमी होने के कारण मंडियों में धान जमा है। ऐसे में बारिश ने किसानों और आढ़तियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कुरुक्षेत्र: थानेसर मंडी में 20 करोड़ से अधिक के धान के भीगने का दावा
कुरुक्षेत्र जिले में रविवार तक 3,37,778 मीट्रिक टन धान उठान के इंतजार में था। इसमें से अधिकतर धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ था। कुछ धान को तिरपाल से ढका गया, लेकिन अधिकांश बारिश की चपेट में आ गया।
आढ़तियों का दावा है कि अकेले थानेसर अनाज मंडी में ही 20 करोड़ रुपये से अधिक का धान भीगा है। पूरे जिले में नुकसान 100 करोड़ रुपये से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। वास्तविक नुकसान का आकलन प्रशासन की ओर से किया जाना है।
बारिश के बाद मंडियों में धान का उठान किया जा रहा है। वहीं, रविवार दोपहर तक खरीद भी शुरू नहीं हो पाई थी। ऐसे में किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है।
कैथल: 2.69 लाख मीट्रिक टन पीआर धान भीगा
कैथल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में बारिश के कारण करीब 2.69 लाख मीट्रिक टन पीआर धान भीग गया। इसमें बोरियों में भरा धान और खुले में पड़ा बिना बिका धान दोनों शामिल हैं। मंडियों में बारिश से बचाव के इंतजाम नाकाफी होने के कारण धान को नुकसान पहुंचा।
रविवार तक जिले में 3.28 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी थी। इसमें से 1.69 लाख मीट्रिक टन की खरीद हुई, लेकिन उठान केवल 59.56 हजार मीट्रिक टन का हो पाया था। बड़ी मात्रा में धान मंडियों में ही पड़ा होने के कारण बारिश ने किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ा दी।
यमुनानगर: 13 मंडियों में 57 हजार मीट्रिक टन धान खुले में
यमुनानगर जिले की सभी 13 अनाज मंडियों में अब तक 1,37,530 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 95,376 मीट्रिक टन की खरीद हुई, लेकिन उठान केवल 24,188 मीट्रिक टन का हुआ है। यह खरीदे गए धान का करीब 25.35 प्रतिशत है। वहीं, मंडियों में करीब 57 हजार मीट्रिक टन धान खुले में पड़ा है।
बारिश से व्यासपुर, रणजीतपुर, जगाधरी, सरस्वतीनगर, छछरौली, रादौर और साढौरा मंडियों में धान अधिक प्रभावित हुआ है। सोमवार सुबह से मजदूर मंडियों की सड़कों और फड़ों पर धान सुखाने में जुटे रहे। हालांकि, सड़कों के किनारे पानी जमा होने और धान गीला होने के कारण उसे सुखाने में परेशानी आ रही है।
किसानों को ट्रैक्टर-ट्रालियों से धान उतारने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में कई किसान अपनी ट्रालियों में ही धान रखे हुए हैं।
जगाधरी अनाज मंडी में पहुंचे किसान लज्जा राम और सुखदेव ने बताया कि उनका धान भीग गया है। अब इसे सूखने में समय लगेगा। उन्हें चिंता है कि नमी कम होने और धान की बिक्री होने तक कितना इंतजार करना पड़ेगा।
जगाधरी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मुनीष कांबोज ने कहा कि यदि धान का उठान तेजी से होता तो भीगने की नौबत नहीं आती। उनके अनुसार, जीपीएस लोकेशन में बार-बार खराबी आने के कारण ट्रकों के आउट गेटपास नहीं कट पा रहे हैं, जिससे उठान प्रभावित हो रहा है।
पानीपत: डेढ़ लाख क्विंटल धान भीगा, तीन दिन से खाली नहीं हुआ वाहन
पानीपत की अनाज मंडी में करीब डेढ़ लाख क्विंटल धान बारिश में भीग गया। मंडी से तीन दिन पहले धान लेकर इंद्री भेजा गया वाहन अब तक खाली नहीं हो पाया है। उठान और परिवहन में देरी के कारण मंडियों में धान जमा है। बारिश के बाद इसकी सुरक्षा और समय पर उठान को लेकर किसानों तथा आढ़तियों की चिंता बढ़ गई है।
बारिश के बाद मंडियों में सबसे बड़ी चुनौती धान को सुखाने और उसकी नमी कम करने की है। पहले से धीमे उठान के बीच बारिश ने मंडियों में जगह की कमी और किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।