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Chandigarh-Haryana News: आदेश लागू होने के बावजूद अवमानना याचिका, 30,000 रुपये जुर्माना लगाया

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- अदालत ने इसे माना न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग, रोकने की बताई जरूरत
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- इस प्रकार की याचिकाओं से अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर जताई चिंता


चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अवमानना याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने पाया कि जिस आदेश के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया गया था वह पहले ही लागू किया जा चुका था। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग हैं जिसे रोकने की जरूरत है।


याचिका प्रकाश सिंह ने दायर की थी और सात जुलाई 2025 को जारी हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया गया था। आदेश में अदालत ने प्रतिवादियों को एक मई 2025 को कानूनी नोटिस पर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि आदेश का पालन पहले ही किया जा चुका है। 21 अगस्त 2025 को कारणयुक्त आदेश पारित कर दिया था। इस आदेश की प्रति न केवल रिकॉर्ड पर रखी गई थी बल्कि याचिकाकर्ता के वकील को भी उपलब्ध करा दी गई थी। इस पर जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि अब याचिका कायम रखने योग्य नहीं है।
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अदालत ने कहा कि इस तरह का आचरण न्यायिक प्रक्रिया के घोर दुरुपयोग के समान है और इससे अदालतों में मामलों की बढ़ती लंबितता में अनावश्यक वृद्धि होती है। हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक कार्यवाहियों की पवित्रता बनाए रखना और उनके दुरुपयोग को रोकना अदालत का कर्तव्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का समय और संसाधन केवल उन्हीं वास्तविक मामलों के लिए सुरक्षित रहने चाहिए, जो वास्तव में न्यायिक हस्तक्षेप के योग्य हों। अवमानना याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने इसे तुच्छ और निरर्थक करार दिया और याचिकाकर्ता पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
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