नारनौंद से कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने हरियाणा सरकार की बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की योजना पर सवाल उठाते हुए बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार को बिजली विभाग से सालाना करीब 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, जिसमें अकेले नूंह और गुरुग्राम जिलों से 9,200 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई होती है। इसके बावजूद भाजपा सरकार इन दोनों जिलों की बिजली वितरण व्यवस्था Eleven Power Private Limited नामक कंपनी को सौंपने जा रही है। विधायक ने सवाल उठाया कि जब बिजली विभाग प्रदेश के लिए इतना बड़ा राजस्व जुटा रहा है, तो फिर इसकी व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
विधायक जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि संबंधित कंपनी का गठन महज एक साल पहले हुआ बताया जा रहा है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जिस कंपनी के पास बिजली वितरण के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव नहीं है और जिसके आवश्यक संसाधनों, रखरखाव की क्षमता तथा आर्थिक सामर्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी जा रही है। उन्होंने कहा कि ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची’ का दावा करने वाली भाजपा सरकार को इस फैसले की पूरी प्रक्रिया जनता के सामने रखनी चाहिए। सरकार बताए कि कंपनी का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया है, उसकी तकनीकी और वित्तीय क्षमता का आकलन कैसे हुआ तथा प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर इतना बड़ा निर्णय लेने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने प्रस्तावित पैरेलल बिजली वितरण लाइसेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस तरह की व्यवस्था को लागू करने का आधार क्या है और देश में ऐसी व्यवस्था के अन्य उदाहरणों की वास्तविक स्थिति क्या है।
जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि बिजली आम जनता, किसानों और छोटे व्यापारियों की बुनियादी जरूरत है। वर्तमान व्यवस्था में बिजली के लिए उपभोक्ताओं से लगभग 2 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट की दर का उल्लेख करते हुए उन्होंने निजीकरण के बाद बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि निजी कंपनी को 50 रुपये प्रति यूनिट तक शुल्क वसूलने का अधिकार दिए जाने संबंधी दावे पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। यदि बिजली की दरों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट, किसानों की खेती और छोटे व्यापारियों के कारोबार पर पड़ेगा। बिजली जैसी आवश्यक सेवा को लेकर किसी भी निर्णय से पहले सरकार को शुल्क निर्धारण की व्यवस्था, उपभोक्ताओं के अधिकारों, निजी कंपनी की जवाबदेही और संभावित आर्थिक प्रभावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। बिजली व्यवस्था का उद्देश्य जनता को निर्बाध आपूर्ति और उचित दरों पर सेवा देना होना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं के सामने अतिरिक्त आर्थिक बोझ की आशंका खड़ी करना।
विधायक जस्सी पेटवाड़ ने बिजली विभाग के कर्मचारियों की निजीकरण के विरोध में चल रही हड़ताल का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों के रोजगार और भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा की जनता के हितों और सस्ती बिजली के अधिकार से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और सरकार को बातचीत के माध्यम से उनकी मांगों का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भाजपा सरकार बिजली विभाग के निजीकरण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करे और प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने से पहले कर्मचारियों, किसानों, आम उपभोक्ताओं तथा संबंधित विशेषज्ञों की चिंताओं पर विचार करे। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिजली विभाग की व्यवस्था में किसी भी बदलाव से कर्मचारियों के हित प्रभावित न हों और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। प्रदेश की बिजली व्यवस्था से जुड़े निर्णय पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।