चंडीगढ़/हिसार। बिजली कंपनियों ने टैरिफ न दिखाकर सीधे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 4520.24 करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा दिखाया। टैरिफ का जिक्र नहीं होने के कारण बढ़ी बिजली दर की सटीक जानकारी नहीं हुई।
इसके अलावा एक अप्रैल से लागू दर को लोगों के बिल में बढ़ाकर सीधा जून में भेजा गया। तब तक 28 मार्च 2025 को टैरिफ प्रपोजल के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की 45 दिन की अवधि निकल गई।
ये बातें सोमवार को कांग्रेस नेता व पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने कहीं। उन्होंने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग में टैरिफ आदेश पर समीक्षा याचिका दायर करने के साथ 45 दिन की अवधि से छूट की मांग की है।
चंडीगढ़ कांग्रेस दफ्तर में प्रेसवार्ता में संपत सिंह ने कहा कि पहली बार घरेलू उपभोक्ता को भी 50 रुपये प्रति किलोवाट से 75 रुपये प्रति किलोवाट का फिक्स्ड चार्ज का झटका दिया गया है। ओवरऑल प्रति यूनिट की दरें भी 25 से 50 फीसदी बढ़ाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियां 7964.28 करोड़ यूनिट बिजली विभिन्न विद्युत उत्पादन इकाइयों से 3.12 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीद रही हैं, जबकि उपभोक्ताओं को 7.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेच रही हैं।
इसी तरह कुल खरीदी गई बिजली में से उपभोक्ताओं को केवल 6916 करोड़ यूनिट दी जा रही है। रास्ते में नुकसान 22 फीसदी से अधिक है, उसका भी भुगतान उपभोक्ताओं को ही करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि दरें भी 6.65 रुपये प्रति यूनिट से 6.95 रुपये प्रति यूनिट कर दी हैं। जिन औद्योगिक उपभोक्ताओं के पास 50 किलोवाट से अधिक लोड है, उनकी 6.55 रुपये प्रति यूनिट की दरों को बढ़ाकर 7.25 रुपये प्रति यूनिट कर दिया है।
इनके तय शुल्क भी 165 रुपये प्रति केवीए (किलोवोल्ट एम्पीयर) से बढ़ाकर 290 रुपये प्रति केवीए कर दिए हैं। जबकि दिल्ली और राजस्थान में निर्धारित शुल्क क्रमशः 125 रुपये व 160 रुपये प्रति किलोवाट है। ब्यूरो