विश्व बाल श्रम निषेध दिवस आज
- प्रदेश के 45 से अधिक बाल गृहों में बच्चों को पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद सहित मिल रहीं कई सुविधाएं
- बाल संरक्षण एक्ट के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देश में संवर रहा भविष्य
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में बाल श्रम की दलदल में फंसे बच्चों को मुक्त करवाकर उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल करने की मुहिम जारी है। बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को यहां नया जीवन मिल रहा है। हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशन में बाल संरक्षण एक्ट के तहत प्रदेशभर के 45 से अधिक बाल गृहों में बच्चों को पढ़ाई-लिखाई, खेल-कूद, योग, सिनेमा देखने, त्योहार मनाने सहित हर प्रकार की खुशियां मिल रही हैं, जो मां-बाप अपने बच्चों को घर पर देते हैं। लेबर एक्ट में 14 साल से कम उम्र वालों को बच्चा माना जाता है, जबकि उसके ऊपर आयु वालों के लिए नियम व कानून अलग है। वहीं, अन्य एक्ट में 18 साल से कम उम्र वालों को बच्चा माना जाता है।
जेजे एक्ट के तहत बाल श्रम से मुक्त करवाए गए बच्चों को बाल गृह में रखा जा रहा है। इसके लिए हर जिले में एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी का नेतृत्व महिला एवं बाल विकास विभाग करता है। इसमें हरियाणा बाल श्रम विभाग के इंस्पेक्टर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य भी शामिल हैं। यह टीम बाल श्रम से मुक्त होने वाले, गुमशुदा सहित अन्य श्रेणी में आने वाले बच्चों को प्रक्रिया के तहत बाल गृह तक पहुंचाते हैं।
सरकारी-निजी स्कूलों में पढ़ रहे तकरीबन 2 हजार बच्चे
प्रदेशभर में बाल श्रम, गुमशुदा सहित किसी भी श्रेणी में मिलने वाले तकरीबन 2 हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनका दाखिला बाल गृह के समीप पड़ने वाले निजी या सरकारी स्कूलों में करवाया गया है। इन बच्चों को स्कूलों में पढ़ाई के साथ खेल-कूद, योग, कोचिंग जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकारी ग्रांट के अलावा एनजीओ की मदद से उठाया जाता है। इसी तरह स्कूलों में शैक्षणिक सत्र निकलने के बाद मिलने वाले बच्चों के लिए बाल गृह में ही पढ़ाई-लिखाई व अन्य गतिविधियों के लिए अनुदेशक बुलाए जाते हैं।
हरिहर योजना के तहत 18 को मिली नौकरी
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल में प्रदेश सरकार ने बाल गृह में रहने वाले 18 वर्ष से अधिक उम्र के 18 युवाओं को 12वीं पास करने के बाद हरिहर योजना के तहत अनुग्रह आधार पर सरकारी नौकरी भी दी गई थी। नियम के तहत कई बार 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले युवाओं को माता-पिता के नहीं मिलने पर भी चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट में पढ़ने-लिखने और रहने की सुविधा मिलती है।