याची ने न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष करने को दी है चुनौती
न्यूनतम आयु से 33 दिन कम होने के कारण परीक्षा से किया वंचित
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीईटी (संयुक्त पात्रता परीक्षा) में निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा को चुनौती देने वाली याचिका पर हरियाणा सरकार और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी करते हुए नौ जून को जवाब तलब किया है।
नाबालिग अभ्यर्थी प्रभजीत सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए दावा किया कि उसे न्यूनतम आयु में 33 दिन कम होने के कारण परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया गया। जबकि वह अन्य सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी करता है। प्रभजीत ने बताया कि 2023 में दसवीं और 2025 में बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है, जिससे वह सीईटी के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता (10+2) पूरी करता है।
सरकार ने 31 दिसंबर 2024 को जारी सीईटी पॉलिसी और 26 मई 2025 की विज्ञप्ति के तहत शर्त रखी है कि जिस आवेदक की उम्र निर्धारित न्यूनतम सीमा (18 वर्ष) से कम है, वह आवेदन करने के लिए अयोग्य माना जाएगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि हरियाणा सिविल सेवा नियम, 2016 (संशोधित 2023) के अनुसार किसी भी सरकारी सेवा में प्रवेश के लिए न्यूनतम उम्र सीमा 18 वर्ष और अधिकतम 42 वर्ष रखी गई है। चूंकि सीईटी केवल पात्रता परीक्षा है और चयन प्रक्रिया (मुख्य परीक्षा एवं नियुक्ति) जुलाई 2025 के बाद संभावित है। इसलिए याचिकाकर्ता को आवेदन की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि वह नियुक्ति से पहले 18 वर्ष का हो जाएगा।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रभजीत की आयु आवेदन की अंतिम तिथि 12 जून 2025 को 17 वर्ष 10 महीने 20 दिन होगी, यानी वह केवल 33 दिन कम है। ऐसे में उसे केवल उम्र की तकनीकी कमी के आधार पर परीक्षा में बैठने से रोकना न्यायोचित नहीं है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने हरियाणा सरकार और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।