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वंचित वर्ग की झेली गई कठिनाई और अनिश्चितता के प्रति आंखें नहीं मूंद सकते : हाईकोर्ट

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हाईकोर्ट ने कहा-करीब ढाई दशक तक सेवा दे चुकी महिला सीवर हेल्पर, नियमित करे सरकार
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-याची की सेवाओं को पार्ट टाइम करार देने की राज्य सरकार की दलील खारिज



अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला सीवर हेल्पर की सेवाओं को नियमित करने का आदेश देते हुए कहा कि वंचित वर्ग की झेली गई कठिनाई, अपमान और अनिश्चितता के प्रति आंखें नहीं मूंद सकते। कोर्ट ने याची को पार्ट टाइम कर्मचारी करार देने वाली हरियाणा सरकार की दलील को खारिज कर दिया।
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याचिकाकर्ता को 07 जनवरी 1997 को सोनीपत डिवीजन में ग्रुप-डी पद पर सीवर हेल्पर के रूप में दैनिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। 01 मार्च 2011 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं जिसे श्रम न्यायालय ने अवैध ठहराते हुए अप्रैल 2016 को पुनर्नियुक्ति, सेवा में निरंतरता और 50 प्रतिशत बकाया वेतन का आदेश दिया। इसके बाद सरकार ने इसे चुनौती दी जिसे 03 अप्रैल 2017 को खारिज कर दिया गया। अगस्त 2017 को याचिकाकर्ता को पुनः नियुक्त किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 1 अक्तूबर 2003 और 10 फरवरी 2004 की नियमितीकरण नीतियों के तहत सेवाएं नियमित करने की मांग की। उसने दलील दी कि वह आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर चुकी थी और उसी विभाग में उससे जूनियर कई कर्मचारियों को 2014 में नियमित किया गया। जस्टिस संदीप मौदगिल ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को एक माह के भीतर नियमित दर्जा दिया जाए तथा सभी परिणामी लाभ और बकाया राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित प्रदान की जाए।
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