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Chandigarh-Haryana News: भाजपा को जल्द मिलेगा नया प्रदेश अध्यक्ष

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हाईकमान ने बदलाव पर लगाई मुहर, अब किसी भी वक्त जारी हो सकता है नियुक्ति पत्र
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राज्य सरकार के तीन मंत्रियों के नाम पर भी चर्चा, पार्टी दलित पर खेल सकती है दांव


आशीष वर्मा
चंडीगढ़। भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष बहुत जल्द मिलने वाला है। भाजपा हाईकमान ने बदलाव पर मुहर लगा दी है। अब किसी भी वक्त पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए तीन मंत्रियों के साथ कई और नेताओं के नाम पर मंथन हुआ है। इस बात की पूरी संभावना है कि पार्टी किसी दलित पर दांव खेल सकती है। पार्टी के एक नेता ने यहां तक बताया कि हाईकमान ने नाम तय कर दिया है। बस चिट्ठी जारी होना बाकी है।
हरियाणा भाजपा के नए अध्यक्ष को लेकर पिछले कई महीनों से चर्चा चल रही है। हालांकि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली को पद संभाले सिर्फ सवा साल हुए हैं। उन्हें पिछले साल लोकसभा चुनाव के बाद नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की थी। इसके अलावा संगठन के कामकाज में भी उनका बेहतर प्रदर्शन रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ भी अच्छी बनती है मगर प्रदेश के बदल रहे राजनीतिक हालात में वे फिट नहीं बैठ रहे हैं। ऐसे में पार्टी ने बदलाव का मन बना लिया है। हाईकमान ने प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए पूरा होम वर्क कर लिया है। जातीय समीकरण को भी नाप-तौल कर देखा गया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि अब प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कोई चुनाव नहीं होगा। हाईकमान से सीधे नियुक्ति पत्र आएगा।
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पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में कई नामों की चर्चा होती रही है। इनमें प्रदेश सरकार के मंत्रियों कृष्ण लाल पंवार, कृष्ण बेदी और महिपाल ढांडा के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा दलित समुदाय से आने वाले सुदेश कटारिया के नाम भी चर्चा चल रही है हालांकि भाजपा अक्सर ऐसी नियुक्तियों पर आश्चर्यचकित करती आई है। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति पर मंथन करते वक्त कांग्रेस में पिछले दिनों हुए बदलाव का भी अध्ययन किया है। दरअसल कांग्रेस ने हाल ही में ओबीसी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। कांग्रेस की दो दशक की राजनीति में यह पहली बार है जब प्रदेश अध्यक्ष दलित समुदाय के बजाय दूसरी जाति का चुना गया है। हरियाणा में करीब 22 फीसदी दलित हैं और 17 विधानसभा क्षेत्र एससी के लिए आरक्षित हैं। इन सब कारणों से पार्टी दलित नेता पर दांव लगा सकती है।
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