मंत्रिमंडल ने विकास परियोजनाओं-2025 के लिए नई भूमि खरीद नीति को दी मंजूरी
बिचौलियों को भी प्रोत्साहित करने के लिए सुविधा शुल्क के तहत मिलेगी राशि
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मंत्रिमंडल ने भूमि मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब भूमि मालिक विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन के आंशिक हिस्से को भी बेच सकेंगे। पहले ऐसा प्रावधान नहीं था। इससे विकास परियोजनाओं में भी बाधा आ रही थी।
मंत्रिमंडल की बैठक में विकास परियोजनाओं के लिए सरकारी विभागों, उसकी संस्थाओं अर्थात बोर्ड एवं निगमों व सरकारी कंपनियों को स्वेच्छा से दी जाने वाली भूमि खरीद के लिए नीति, 2025 को मंजूरी दे दी गई है। इसका मकसद भूमि मालिकों को एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जिससे वे उपयुक्त खरीदारों की अनुपलब्धता के कारण अत्यधिक आवश्यकता के समय अपनी भूमि को कम दामों पर बेचने से बच सकें। भूमि मालिक अपनी भूमि की पेशकश कर उसका अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकेगा।
वहीं, इस नीति में बिचौलियों को भी प्रोत्साहन दिया गया है। बिचौलियों को कुल लेनदेन लागत का एक फीसदी सुविधा शुल्क दो किस्तों में दिया जाएगा। पहली किश्त 0.5 प्रतिशत रजिस्ट्री होने पर और शेष 0.5 प्रतिशत म्यूटेशन स्वीकृत होने व कब्जा सौंपे जाने के बाद दी जाएगी। परियोजना की कुल संभावित भूमि का कम से कम 70 प्रतिशत अपलोड करने वाले बिचौलिये को प्रोत्साहन भुगतान दिया जाएगा, जो भूमि की दरों के आधार पर 1,000 रुपये प्रति एकड़ से लेकर 3,000 रुपये प्रति एकड़ तक होगा। यदि भूमि कलेक्टर दर पर उपलब्ध करवाई जाती है तो 3 हजार रुपये प्रति एकड़, यदि भूमि कलेक्टर दर से अधिकतम 20 प्रतिशत अधिक दर पर उपलब्ध करवाई जाती है तो 2 हजार रुपये प्रति एकड़, और यदि भूमि इससे भी अधिक दर पर उपलब्ध करवाई जाती है तो 1 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सेवा आयोग अब सीधे संज्ञान ले सकेगा
अब हरियाणा सेवा आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान ले सकता है, जहां विभाग की ओर से निर्धारित समयावधि के भीतर आवेदन/अपीलों का निस्तारण नहीं किया गया हो और ऐसे आवेदन/अपीलों के निस्तारण में अनुचित विलंब हो। किसी भी त्रुटि या चूक पाए जाने पर आयोग इस संबंध में उचित आदेश पारित कर सकता है।
मुख्य सचिव कार्यालय के संबंधित पदों के अनुरूप होंगे वित्त आयुक्त कार्यालय के पद
बैठक में हरियाणा वित्त आयुक्त कार्यालय (ग्रुप-ए) राज्य सेवा नियम, 1980 में प्रमुख संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके तहत वित्त आयुक्त कार्यालय में मंत्री के विशेष वरिष्ठ सचिव, मंत्री के वरिष्ठ सचिव और मंत्री के सचिव के अपग्रेड किए गए पदों के लिए भर्ती की पद्धति, योग्यताएं और अनुभव आवश्यकताओं को मुख्य सचिव के कार्यालय में संबंधित पदों के अनुरूप किया जा सके। इन संशोधनों से यह भी सुनिश्चित होगा कि नियुक्तियां पदोन्नति, स्थानांतरण या सीधी भर्ती के माध्यम से की जाएंगी। पात्रता की शर्तें भी स्पष्ट रूप से परिभाषित होंगी और विभिन्न कार्यालयों में समकक्ष पदों पर सेवा शर्तों का मानकीकरण होगा, जिससे प्रशासनिक दक्षता और कॅरिअर प्रगति में स्पष्टता आएगी।
महाविद्यालय के कर्मचारियों के दिव्यांग बच्चों को भी मिलेगी पेंशन
हरियाणा सहायता प्राप्त महाविद्यालय के कर्मचारी के मानसिक व शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन व अनुकंपा सहायता मिलेगी। बशर्ते कि वे कर्मचारी के जीवित रहते उस पर पूरी तरह से आश्रित हों। इस फैसले से कर्मचारियों के मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग बच्चों को अब आयु या तकनीकी परिभाषाओं के कारण पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने से वंचित नहीं रखा जाएगा।
सैनिक व अर्द्धसैनिकों के आश्रितों को मिली नौकरी
बैठक में युद्ध हताहतों के आश्रितों को अनुकंपा आधार पर दी जाने वाली नियुक्ति नीति में छूट को मंजूरी प्रदान की गई। युद्ध में हताहत हुए सैनिक/अर्ध सैनिक का आश्रित मृतक के पद के आधार पर ग्रुप बी, सी या डी के पदों में नियुक्ति के लिए पात्र हैं। बशर्ते कि नीति के शुरू होने के तीन साल के अंदर-अंदर आवेदन किया हो। राज्य सरकार को युद्ध में हताहत हुए लोगों के कई आश्रितों से अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे, जो निर्धारित तीन साल की अवधि के भीतर आवेदन नहीं कर सके। सरकार ने ऐसे सात मामलों में छूट प्रदान की। इससे सात सैनिकों व अर्द्धसैनिकों के आश्रितों के बच्चों को नौकरी की स्वीकृति दी है। वहीं, कैबिनेट ने आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए देवेन्द्र भाटी के भाई श्रीभगत सिंह को नीति में छूट देते हुए अनुकंपा आधार पर नियुक्ति देने को स्वीकृति प्रदान की है।