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डॉ. मनमोहन सिंह को दिया जाए भारत रत्न: शर्मिष्ठा मुखर्जी बोलीं- यह परंपरा, पूर्व पीएम के बनाए जाते हैं स्मारक

Sat, 28 Dec 2024 06:57 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। नई दिल्ली के निगम बोध घाट पर दिवंगत पीएम का अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर डॉ. सिंह की पत्नी गुरुशरण कौर और उनकी बेटियां मौजूद रही।
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लेखिका शर्मिष्ठा मुखर्जी - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश के पहले सिख प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का शनिवार को दिल्ली में निगम बोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रोफेसर, आरबीआई गवर्नर, मुख्य आर्थिक सलाहकार, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और वित्त मंत्री जैसे पदों पर रहने के बाद डॉ. मनमोहन सिंह 10 साल प्रधानमंत्री भी रहे। उन्हें अब तक का सबसे ज्यादा शिक्षित प्रधानमंत्री माना जाता है। 
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वहीं अब डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक और उन्हें भारत रत्न देने को लेकर सियासत गरमाने लगी है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए जगह आवंटित करने के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी व लेखिका शर्मिष्ठा मुखर्जी का कहना है कि इस मुद्दे पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह हमारी परंपरा रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री के लिए स्मारक बनाए जाते हैं। डॉ. मनमोहन सिंह के देश के लिए उनके शानदार योगदान को देखते हुए उनके स्मारक पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए और उन्हें भी भारत रत्न दिया जाना चाहिए। 
 

क्या बोले अनिल विज
हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने भी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर दुख जताया है। विज का कहना है कि डॉ. मनमोहन सिंह की यादें हमेशा बनी रहेंगी। क्योंकि जिस शालिनता और अपने ज्ञान से उन्होंने देश का मार्ग दर्शन किया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।  
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मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार राजघाट पर न करना अपमानजनक : धामी
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भारत सरकार से कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह के परिवार की मांग के अनुरूप उनकी याद में उपयुक्त स्मारक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को याद रखना चाहिए कि डाॅ. मनमोहन सिंह के कारण ही देश आज स्थिर है और सरकार का कर्तव्य है कि उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए परिवार की भावना के अनुरूप उचित सम्मान दिया जाए। एडवोकेट धामी ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व के निधन के बाद उनका संस्कार राजघाट पर न करना अपमानजनक है। ऐसा नहीं होना चाहिए था।




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