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हरियाणा में बैंक घोटाला: पहले से मिलते रहे गड़बड़ी के संकेत, अफसरों ने नहीं रोका 657 करोड़ का खेल

Sat, 03 Oct 2026 09:54 AM IST
Naveen आशीष वर्मा, चंडीगढ़

सार

हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड का बैंक खाता आईडीएफसी बैंक में खोला गया, जबकि यह बैंक सूचीबद्ध नहीं था। तत्कालीन एमडी मोहम्मद शाइन ने बैंक के शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि को वित्त निदेशक अमित दीवान और मुख्य लेखा अधिकारी बहादुर सिंह गोसाईं से मिलवाया था।
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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक स्कैम। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के 657 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में गड़बड़ी के संकेत शुरुआत से ही सामने आते रहे, लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक कई विभागों में रकम जमा कराने की तय सीमा से लेकर संदिग्ध लेन-देन, फर्जी बैंक स्टेटमेंट और नियमों की अनदेखी तक के मामले सामने आए, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।

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जूनियर अधिकारियों ने आपत्तियां उठाईं, मगर घोटाले में शामिल अधिकारियों ने कभी डांटकर तो कभी पद से हटाकर शांत करा दिया। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, इन चेतावनियों पर समय रहते कदम उठाए जाते तो संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाई जा सकती थी, लेकिन कथित तौर पर बार-बार सामने आई चेतानियों को नजरअंदाज होते रहे और सरकारी धन से जुड़ी गड़बड़ियां आगे बढ़ती रहीं।

पंचायत विभाग : अफसर के सवाल उठाने पर मिली फटकार, जारी रहा रकम जमा कराने का सिलसिला
हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन प्रशासनिक सचिव साकेत कुमार ने बिना कोटेशन मंगवाए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड खाते खोलने पर जोर दिया। विभाग के उपनिदेशक मनोज कौशल ने साकेत कुमार के सामने दोनों बैंकों की जमा सीमा का मुद्दा उठाया।
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उन्होंने बताया कि आईडीएफसी बैंक में अधिकतम 50 करोड़ और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 25 करोड़ रुपये जमा किए जा सकते हैं, जबकि उस समय तक करीब 112 करोड़ रुपये भेजने की योजना बन चुकी थी। इस पर मनोज कौशल को फटकार लगाई गई। हालांकि, चार्जशीट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्हें किस अधिकारी ने फटकार लगाई। मगर यह विवरण साकेत कुमार से जुड़े आरोपों के क्रम में दर्ज है, जिसके आधार पर जांच एजेंसी ने इस घटनाक्रम को उनके खिलाफ दर्ज कृत्यों में शामिल किया है।

पंचकूला निगम में दो बार उठी आपत्ति, फिर भी जारी होते रहे चेक

पंचकूला नगर निगम के लेखा लिपिक शशि ने 9 जनवरी 2026 को खाते की वास्तविक रकम और बैंक स्टेटमेंट में अंतर पकड़ा और इसकी जानकारी वरिष्ठ लेखा अधिकारी सुरेंद्र जैन को दी। जैन ने इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के बजाय ऐसी नोटशीट तैयार की, जिसमें बैंक की खराब सेवा को खाता बंद करने का कारण बताया गया।

वहीं, सेक्शन ऑफिसर अनिल कुमार ने जब प्रतिस्पर्धी कोटेशन मांगने का सुझाव दिया तो तत्कालीन निगम आयुक्त आरके सिंह ने उसे चैंबर में बुलाकर डांटा- और कहा कि भाई तू बहुत ज्यादा समझदार है क्या, तूने क्यो लिखी यह लाइन, जब मैं बता रहा हूं एफडी रेट ज्यादा है। बाद में अनिल कुमार को पद से हटा दिया गया।

50 करोड़ की सीमा बताई, फिर भी जमा कराए 100 करोड़

आईएएस पंकज अग्रवाल जब शिक्षा विभाग में तैनात थे तो उन्होंने वित्त विभाग की तरफ से तय 50 करोड़ रुपये की सीमा के बावजूद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते में 100 करोड़ रुपये जमा करने की कोशिश की। कार्यकारी अभियंता भूपिंदर सिंह ने 31 वित्त विभाग की मंजूरी जरूरी होने की बात कही थी। तत्कालीन मुख्य वित्तीय सलाहकार किरण लेखा वालिया ने भी सचिव पंकज अग्रवाल को बताया था कि बैंक में जमा की सीमा 50 करोड़ रुपये है। इन आपत्तियों के बावजूद 100 करोड़ रुपये जमा कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। पंकज अग्रवाल ने आपत्ति जताने वाले अधिकारी से कहा कि वे ज्यादा कानून न सिखाएं। इसके बाद पिछली तारीख की नई नोटशीट तैयार कर मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की गई।

10 करोड़ की धोखाधड़ी पर FIR के बजाय सुलह का भरोसा दिया

पंकज अग्रवाल जब हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (एचएसएएमबी) में तैनात थे तो चीफ अकाउंट्स ऑफिसर राजेश सांगवान तत्कालीन अध्यक्ष से बार-बार शिकायत की कि उन पर बैंक अधिकारी के पक्ष में दबाव डाला जा रहा है। जब बोर्ड के खाते से दस करोड़ की धोखाधड़ी सामने आई तो अध्यक्ष ने एफआईआर प्रस्ताव दिया। इस पर पंकज अग्रवाल ने रिभव ऋषि रसूखदार व्यक्ति हैं और 10-20 करोड़ रुपये उनके लिए कोई बड़ी रकम नहीं है। एजेंसी ने कहा कि अग्रवाल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पैसा वापस मिल जाएगा और उन्हें कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया।
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14 फीसदी ब्याज का लालच दिया, फिर आंखें मूंदे रहे

हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड का बैंक खाता आईडीएफसी बैंक में खोला गया, जबकि यह बैंक सूचीबद्ध नहीं था। तत्कालीन एमडी मोहम्मद शाइन ने बैंक के शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि को वित्त निदेशक अमित दीवान और मुख्य लेखा अधिकारी बहादुर सिंह गोसाईं से मिलवाया था। एफडी तोड़कर रकम नए खाते में जमा की गई। बैंक ने 14 फीसदी ब्याज का आफर दिया। चूंकि मंजूरी सबसे वरिष्ठ पद से आई थी, इसलिए नीचे के किसी अधिकारी के लिए सवाल उठाना व्यावहारिक रूप से असंभव था। निगरानी-तंत्र की सबसे ऊपरी कड़ी ही साजिश का हिस्सा थी। सीबीआई का कहना है कि इतनी ज़्यादा ब्याज दर पर शक होना चाहिए था।
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