हरियाणा सरकार ने पट्टे के नियमों में किया बदलाव, उपलब्ध कृषि भूमि का 10 प्रतिशत या एक एकड़ हिस्सा रखना होगा अलग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में गांवों की साझा जमीन पर अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने शामलात भूमि को पट्टे पर देने के नियमों में बदलाव करते हुए खेती के लिए उपलब्ध जमीन का कम से कम एक एकड़ या 10 प्रतिशत हिस्सा (जो भी अधिक हो) प्राकृतिक खेती के लिए आरक्षित करना अनिवार्य कर दिया है। इस जमीन का आवंटन केवल पात्र भूमिहीन लोगों को ही किया जाएगा। इसके लिए खुली नीलामी होगी जिसमें भूमिहीन लोग ही हिस्सा ले सकेंगे।
विकास एवं पंचायत विभाग के अपर मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार की ओर से वीरवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक इसका उद्देश्य पंचायतों की साझा जमीन के एक हिस्से को प्राकृतिक खेती के लिए निर्धारित करना है। इससे भूमिहीन लोगों को प्राकृतिक खेती करने का अवसर मिलने के साथ खेती के इस तरीके को प्रोत्साहन देने की सरकार की कोशिश को भी बल मिलेगा।
जमीन के पट्टे के लिए भूमिहीन ही लगा सकेंगे बोली
प्राकृतिक खेती के लिए आरक्षित शामलात जमीन का पट्टा केवल पात्र भूमिहीन लोगों को ही दिया जाएगा। इस जमीन की खुली नीलामी में भी केवल पात्र भूमिहीन लोग ही बोली लगा सकेंगे। सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव किया है। यह बदलाव ग्राम शामलात भूमि (विनियमन) अधिनियम, 1961 की धारा 15 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए किया गया है।