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Chandigarh-Haryana News: नकली घी कांड में आरोपी कांस्टेबल को अग्रिम जमानत से इन्कार

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-वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर काम करने की दलील हाईकोर्ट ने की अस्वीकार
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-कहा- रिश्वत मांगने और लेने के आरोप गंभीर, केवल अधीनस्थ होने से जिम्मेदारी कम नहीं होती
अमर उजाला ब्यूरो



चंडीगढ़। नकली घी निर्माण एवं सप्लाई रैकेट से जुड़े बहुचर्चित भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी कांस्टेबल दुष्यंत को राहत से इन्कार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याची अपने वरिष्ठ अधिकारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार के निर्देशों पर भी कार्य कर रहा था तब भी इससे उसके खिलाफ लगे रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप किसी भी प्रकार कम या कमजोर नहीं होते।



जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री प्रथमदृष्टया यह संकेत देती है कि याची उस पुलिस टीम का हिस्सा था जिसने न केवल रिश्वत की मांग की बल्कि उसे स्वीकार भी किया। ऐसे गंभीर आरोपों को प्रारंभिक स्तर पर हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा कि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
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नकली घी निर्माण और वितरण के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई थी। आरोप उभरे की जांच से जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों ने आरोपियों को लाभ पहुंचाने, रिकॉर्ड में हेरफेर करने और मामले को प्रभावित करने के लिए भारी रिश्वत ली। इसके बाद गठित विशेष जांच दल ने अपनी जांच में पाया कि इंस्पेक्टर अरुण कुमार, एएसआई संदीप और कांस्टेबल दुष्यंत आदि ने एक बिचौलिए के माध्यम से अवैध रकम प्राप्त की। जांच में 14 लाख और 5 लाख रुपये तक की रिश्वत की बात सामने आई। एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर जनवरी 2026 में नई एफआईआर दर्ज की गई जिसमें भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, साक्ष्य नष्ट करने और पद के दुरुपयोग जैसी गंभीर धाराएं शामिल की गईं। अभियोजन के अनुसार कांस्टेबल दुष्यंत की करीब 2.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेने में सक्रिय भूमिका रही। अदालत ने विशेष रूप से कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन चार्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 दिसंबर 2025 को शाम 6 से 7 बजे के बीच याची समालखा में मौजूद था जहां कथित रिश्वत भुगतान हुआ। यह तथ्य जांच एजेंसी के आरोपों को बल देता है।
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