-याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के तबादले पर लगाई रोक
-स्थानांतरण नीति को दमनकारी बताते हुए रद्द करने की याचिका में की गई है मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) की स्थानांतरण नीति से जुड़े विवाद मामले में आदेश के बावजूद जवाब दाखिल न करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के तबादले पर रोक लगा दी है।
जूनियर इंजीनियर पद पर कार्यरत मदनजीत और अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस नीति पर रोक लगाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सरकार और निगम से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर दलील दी गई कि नई ट्रांसफर नीति जेई-1 के पदाधिकारियों के लिए असंगत है और उनके सम्मान और करियर के साथ अन्याय करती है। उन्होंने बताया कि वर्षों की सेवा के बाद प्रमोशन पाकर कर्मचारी जेई-1 के पद तक पहुंचे हैं लेकिन अब इस नीति के जरिए उन्हें दोबारा जेई के पद पर भेजा जा सकता है जो मानसिक रूप से अपमानजनक है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि ट्रांसफर के बाद जेई-1 अधिकारियों को उनसे कम अनुभव रखने वाले या कनिष्ठ अधिकारियों के अधीन कार्य करना पड़ेगा जिससे उनकी गरिमा और वरिष्ठता प्रभावित होगी। हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल दो प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा है, क्या जेई और जेई-1 के पदों को एक-दूसरे में बदला जा सकता है? क्या दोनों पदों पर कार्यरत अधिकारियों की ड्यूटी की प्रकृति समान है या भिन्न? कोर्ट ने राज्य सरकार को इन प्रश्नों का जवाब शपथ पत्र के माध्यम से तीन नवम्बर तक तक दाखिल करने का आदेश दिया है।