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आरटीआई को कमजोर करने वाले संशोधन रद्द हों: हुड्डा

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह कानून आम नागरिक को सशक्त करने का मजबूत माध्यम था जिसे कांग्रेस सरकार ने 2005 में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद कई संशोधनों के जरिए आरटीआई को कमजोर किया जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता घटने और भ्रष्टाचार बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि आरटीआई को कमजोर करने वाले संशोधनों को रद्द किया जाए।
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हुड्डा ने कहा कि आरटीआई, मनरेगा, शिक्षा का अधिकार और खाद्य सुरक्षा जैसे जनहितकारी कानूनों की शृंखला का हिस्सा था जिसने आम लोगों खासकर कमजोर वर्गों को अपनी आवाज उठाने का हक दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि सूचना आयोग में खाली पदों को तुरंत भरा जाए और कामकाज के मानक तय किए जाएं। मामलों के निपटारे की रिपोर्टें सार्वजनिक की जाएं। साथ ही व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कर आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा दी जाए और आयोग में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों व महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
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