-हाईकाेर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंचायत जमीन पर हुए फर्जी रजिस्ट्रेशन घोटाले की जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा योजना के तहत कैथल की ग्राम पंचायत खारौदी की जमीन पर फर्जी किसानों के नाम दर्ज कर धोखाधड़ी की गई है।
गांव खारौदी निवासी किसान गुरमीत सिंह पुत्र देशा सिंह के वकील मनीष बूरा और अंकुर गोयल ने अदालत से मांग की है कि हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को इस घोटाले की गहन जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई करने के आदेश दिए जाएं। साथ ही, डीसी कैथल को निर्देश दिए जाएं कि याचिकाकर्ता का नाम भी योजना में दर्ज किया जाए ताकि वे अपनी फसल को एमएसपी पर बेच सकें। याचिका में कहा गया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ता को फर्जी रजिस्ट्रेशन की वजह से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई भी की जाए।
गुरमीत सिंह ने अपने हलफनामे में आरोप लगाया है कि उनके पूर्वज आजादी से पहले से ही पंचायत जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। 1974-75 की जमाबंदी में उनके दादा मान सिंह का नाम दर्ज है और 2019-20 की जमाबंदी में उनके पिता देशा सिंह का नाम सह-खातेदार के रूप में दर्ज है। बावजूद इसके, पंचायत अधिकारियों और सीएससी ऑपरेटर की मिलीभगत से गांव के निर्मल सिंह (32 एकड़), पोरशोतम पंडित (80 एकड़), मलकित (50 एकड़), पवन पंडित (30 एकड़), सुखदीप यादव (10 एकड़) और सतपाल उर्फ पाली (10 एकड़) ने गैरकानूनी तरीके से जमीन अपने नाम रजिस्ट्रेशन करा ली है। यहां तक कि पशुओं के लिए सुरक्षित चारागाह जमीन को भी फर्जी रजिस्ट्रेशन में शामिल कर दिया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस घोटाले की वजह से वास्तविक किसान अपनी फसल सरकार को एमएसपी पर बेचने से वंचित हो रहे हैं। वहीं, आढ़ती और उनके मुनीम किसानों से सस्ते दामों पर फसल खरीदकर फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए सरकार को महंगे दाम पर बेच रहे हैं। इससे न केवल किसानों को बल्कि सरकारी खजाने को भी भारी नुकसान हो रहा है।