चंडीगढ़। सेवानिवृत्ति से पहले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को अंतिम छह महीनों की सेवा अवधि में सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) एडवांस नहीं दिया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों को ये निर्देश जीपीएफ की प्रक्रिया में अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से जारी किए हैं।
आदेश के मुताबिक कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की तिथि से पूर्व 12 महीनों में स्वीकृत किए गए अग्रिम या निकासी की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रपत्रों में दर्ज और प्रशासनिक विभाग की ओर से प्रमाणित की जानी चाहिए।
अंतिम भुगतान का मामला प्रधान महालेखाकार के कार्यालय को भेजने के बाद यदि किसी परिस्थिति में एडवांस स्वीकृत किया जाता है तो इसकी सूचना तुरंत आधिकारिक ईमेल या अन्य औपचारिक माध्यम से देनी होगी ताकि भुगतान में आवश्यक समायोजन किया जा सके।
पत्र के अनुसार वित्त विभाग के संज्ञान में आया है कि कुछ प्रशासनिक विभाग और डीडीओ, जीपीएफ अंतिम भुगतान मामलों को प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) के कार्यालय को भेजने के बाद भी वसूली योग्य या गैर-वसूली योग्य एडवांस (अग्रिम) स्वीकृत कर रहे हैं। इसके साथ ही कई मामलों में यह भी पाया गया है कि जीपीएफ अंतिम भुगतान से जुड़े पीएफ-09 और पीएफ-10 प्रपत्रों में अग्रिम या निकासी से संबंधित अनिवार्य विवरण विशेषकर सेवानिवृत्ति की तिथि से पूर्व 12 महीनों की अवधि से जुड़े विवरण सही प्रकार से नहीं भरे जा रहे हैं और न ही प्रशासनिक विभाग द्वारा प्रमाणित किए जा रहे हैं।
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की चूक से भुगतान में गड़बड़ी और अधिक भुगतान की आशंका बढ़ जाती है। इससे राज्य को वित्तीय हानि हो सकती है। ब्यूरो