सरकारी संस्थानों में आधी सीटें ऑल इंडिया और आधी राज्य मेरिट से भरेंगी, निजी कॉलेजों में 50 फीसदी सीटें मैनेजमेंट कोटे की रहेंगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (एमडीएस) में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए इस बार सीटों के बंटवारे से लेकर फीस व कोर्स छोड़ने तक के नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र में सरकारी और निजी डेंटल कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में प्रवेश केंद्रीयकृत ऑनलाइन काउंसलिंग के जरिये होगा। काउंसलिंग की जिम्मेदारी पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक की होगी।
सरकारी संस्थानों में 50 प्रतिशत सीटें नीट एमडीएस-2026 की ऑल इंडिया मेरिट और बाकी 50 प्रतिशत हरियाणा स्टेट मेरिट से भरी जाएंगी। राज्य कोटे में 40 प्रतिशत सीटें इन-सर्विस डॉक्टरों और ईएसआईसी अस्पतालों, डिस्पेंसरी, अन्य संस्थानों व स्वायत्त निकायों में कार्यरत चिकित्सकों के लिए आरक्षित रहेंगी। हरियाणा के संस्थानों से बीडीएस करने वाले विद्यार्थियों के लिए 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण रहेगा। निजी डेंटल संस्थानों में आधी सीटें ओपन मेरिट/स्टेट कोटे और आधी मैनेजमेंट कैटेगरी में होंगी। मैनेजमेंट सीटों की मेरिट ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर तैयार की जाएगी।
कोर्स बीच में छोड़ना पड़ेगा महंगा
एमडीएस में दाखिला लेने के बाद पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने वाले अभ्यर्थी को 10 लाख रुपये की बांड राशि देनी होगी। साथ ही तीन साल तक हरियाणा के किसी पीजी पाठ्यक्रम में आवेदन नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा जिस सत्र में पढ़ाई छोड़ी जाएगी उसकी पूरी फीस और अगले सत्र की 50 प्रतिशत फीस भी देनी होगी। यह नियम मैनेजमेंट कैटेगरी पर भी लागू होगा। काउंसलिंग के लिए अनारक्षित वर्ग को 2500 और हरियाणा के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 1250 रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा। पीजी विद्यार्थियों को सरकारी कॉलेजों के विद्यार्थियों के समान स्टाइपेंड मिलेगा।
इन छह संस्थानों में दाखिले होंगे : पीजीआई डेंटल साइंसेज रोहतक, स्वामी देवी दयाल डेंटल कॉलेज बरवाला, जेएन कपूर डीएवी सेंचुरी डेंटल कॉलेज यमुनानगर, जेसीडी डेंटल कॉलेज सिरसा, सुधा रुस्तगी डेंटल कॉलेज फरीदाबाद और एसजीटी डेंटल कॉलेज गुरुग्राम।