- वायु गुणवत्ता आयोग के साथ राज्य के अधिकारियों की बैठक, आयोग ने कहा-अगले 10 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण
-अब तक 19,670 एकड़ क्षेत्र का धान से फसल विविधीकरण किया, शुक्रवार को 19 स्थानों पर आग के मामले चिह्नित
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के अधिकारियों के साथ शुक्रवार को वायु गुणवत्ता आयोग प्रबंधन आयोग की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वायु गुणवत्ता आयोग ने हरियाणा में पराली प्रबंधन के लिए हुए कार्य की प्रशंसा की। हरियाणा के अधिकारियों ने आंकड़े पेश किए और कहा कि 77 प्रतिशत तक पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। अब अगले दो साल में जीरो स्टबल बर्निंग स्टेट बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है। बैठक के दाैरान वायु गुणवत्ता आयोग ने आने वाले 10 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कड़ी निगरानी को कहा है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद विस्तृत जानकारी दी। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने की। उन्होंने करनाल और कुरुक्षेत्र जिलों में निगरानी के कार्य की प्रशंसा की। बैठक के बाद मुख्य सचिव ने बताया कि किसानों को बायो-डीकम्पोजर पाउडर निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए चाैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार 2 लाख एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना लागू की गई है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 94 करोड़ रुपये की लागत से 7,700 से अधिक नई मशीनें स्वीकृत की गई हैं। इस योजना पर इस वर्ष कुल 250.75 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसमें केंद्र सरकार का अंशदान 150.45 करोड़ और राज्य का 100.30 करोड़ रुपये है। राज्य में इस समय 8.17 लाख टन क्षमता के 31 पेलेटाइजेशन व ब्रीकेटिंग संयंत्र हैं। 111.9 मेगावाट क्षमता के 11 बायोमास पावर प्लांट, एक 2जी एथेनॉल संयंत्र, 2 सीबीजी प्लांट और 5 थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं जो संयुक्त रूप से 16.64 लाख टन धान की पराली का उपयोग कर रहे हैं।
गैर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र वाले जिलों में ईंट भट्ठा संचालकों को 2025 तक 20 प्रतिशत और 2028 तक 50 प्रतिशत तक पराली आधारित पेलेट्स का उपयोग करने को कहा गया है। राज्य के कुल 39.31 लाख एकड़ धान क्षेत्र में से 44.40 लाख टन अवशेष इन-सिटू, 19.10 लाख टन एक्स-सिटू और 22 लाख टन चारे के रूप में उपयोग किया जा रहा है। अब तक 19,670 एकड़ क्षेत्र का धान से फसल विविधीकरण किया जा चुका है।
87 मामलों में 4.10 लाख का लगाया जुर्माना
राज्य में 10,028 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं और हरसेक की सैटेलाइट निगरानी से वास्तविक समय में पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाया जाता है। प्रत्येक सत्यापित घटना में एफआईआर दर्ज की जा रही है। अब तक 87 मामलों में 4.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 3.20 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। 87 किसानों के रिकाॅर्ड में रेड एंट्री की गई है। जनवरी से अक्टूबर 2025 तक वैध पाॅल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट न होने के कारण 3,25,989 वाहनों के चालान जारी किए गए हैं। बैठक में एनसीआर में वाहनों और धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भी विस्तार से चर्चा की गई।
19 स्थानों पर आग की घटनाएं चिह्नित, अब तक कुल 224 हुए मामले
मुख्य सचिव ने बताया कि हरियाणा में शुक्रवार को 19 स्थानों पर एक्टिव फायर लोकेशन (एएफएल) के मामले चिह्नित किए गए। इस तरह से कुल एएफएल के मामलों की संख्या बढ़कर 224 हो गई। कृषि विभाग के अनुसार शुक्रवार को फतेहाबाद, हिसार, सोनीपत में 3-3, कैथल में 2, रोहतक और सिरसा में 1-1 स्थानों पर एक्टिव फायर लोकेशन मिली।